अन्नपूर्णा रसोई बनी सुशासन और करुणा की पहचान
जयपुर, 18 मार्च (हि.स.)। प्रदेश में “लक्ष्य अंत्योदय – प्रण अंत्योदय – पथ अंत्योदय” की भावना को साकार करती डबल इंजन सरकार ने अपनी जनहितैषी योजनाओं के माध्यम से सामाजिक सरोकारों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में सुशासन को समर्पित सरकार ने गरीब, श्रमिक, वंचित और जरूरतमंद वर्ग के लिए भोजन की उपलब्धता को केवल सुनिश्चित ही नहीं किया, बल्कि उसे सम्मान, पोषण और गुणवत्ता से भी जोड़ा है।
श्री अन्नपूर्णा रसोई योजना मात्र भोजन वितरण की व्यवस्था नहीं, बल्कि सरकार की संवेदनशील सोच और समावेशी विकास के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक है। राज्य सरकार ने मोटे अनाजों यानी श्री अन्न जैसे बाजरा, ज्वार एवं अन्य मिलेट्स को भोजन थाली में शामिल कर पोषण सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की है। इससे जहाँ आमजन के स्वास्थ्य को बल मिला है, वहीं स्थानीय कृषि को बढ़ावा मिलने के साथ किसानों को भी प्रोत्साहन प्राप्त हुआ है।
राज्य सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार योजना के अंतर्गत भोजन की गुणवत्ता और मात्रा—दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। पूर्व में 450 ग्राम की भोजन थाली को बढ़ाकर अब 600 ग्राम किया गया है, जिसमें 100 ग्राम दाल, 100 ग्राम सब्जी, 100 ग्राम चावल, बाजरा (श्री अन्न) की खिचड़ी, 300 ग्राम चपाती एवं अचार शामिल हैं। इसके साथ ही प्रति थाली अनुदान राशि को 17 रुपये से बढ़ाकर 22 रुपये किया गया है, जो सरकार की जनकल्याण के प्रति गंभीरता और संवेदनशीलता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
श्री अन्नपूर्णा रसोई योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सार्वभौमिकता है। इस योजना के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति बिना किसी भेदभाव के ससम्मान भोजन थाली प्राप्त कर सकता है। यह पहल भूख के विरुद्ध सरकार की सशक्त लड़ाई और सामाजिक समानता की भावना का सशक्त उदाहरण है।
वर्तमान में प्रदेश के 230 नगरीय निकायों में 992 अन्नपूर्णा रसोईयाँ सफलतापूर्वक संचालित की जा रही हैं। साथ ही, नवगठित 79 नगरीय निकायों में प्रत्येक में एक-एक अन्नपूर्णा रसोई प्रारंभ करने की प्रक्रिया भी प्रगतिरत है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कुशल एवं दूरदर्शी नेतृत्व में अब तक लगभग 11.94 करोड़ से अधिक भोजन थालियाँ परोसी जा चुकी हैं, जिससे करोड़ों जरूरतमंद नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है। यह उपलब्धि सरकार की कार्यकुशलता, संवेदनशील प्रशासन और जनकल्याण के प्रति अटूट समर्पण का जीवंत प्रमाण है।
निःसंदेह, श्री अन्नपूर्णा रसोई योजना राज्य सरकार की उन जनकल्याणकारी पहलों में अग्रणी है, जो केवल भूख मिटाने तक सीमित नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, पोषण और सामाजिक न्याय को भी सशक्त करती है। आने वाले समय में भी यह योजना प्रदेश में विकास, सुशासन और मानवीय मूल्यों की पहचान बनी रहेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / संदीप