एआई और डिजिटल तकनीक से स्मार्ट होगी राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था, 400 सीएम राइज स्कूल मॉडल के रूप में होंगे विकसित

 


जयपुर, 12 अगस्त (हि.स.)। राजस्थान में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और रोजगारपरक बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल तकनीक, कौशल विकास और मॉडल स्कूलों पर जोर दिया जा रहा है।

शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश कुमार यादव ने बुधवार को पीरामल फाउंडेशन के चेयरमैन अजय पीरामल, सीईओ आदित्य नटराज तथा मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के चेयरमैन एवं सह-संस्थापक रामदेव अग्रवाल के साथ बैठक कर प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों, नवाचारों, मॉडल विद्यालयों के विकास और भावी कार्ययोजना पर मंथन किया।

अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ कौशल, रोजगारपरक प्रशिक्षण और बेहतर मानसिक स्वास्थ्य का वातावरण उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने प्रदेश में संचालित विभिन्न शैक्षणिक योजनाओं, सरकारी विद्यालयों और शिक्षा कार्मिकों से संबंधित जानकारी साझा की।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में 649 पीएमश्री विद्यालयों की तर्ज पर सीएम राइज योजना के तहत 400 विद्यालयों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इन विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ नवाचारों को बढ़ावा देते हुए विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। बैठक में शिक्षा सेतु कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों की शैक्षणिक आवश्यकताओं और विद्यालयी व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयासों पर भी चर्चा हुई।

बैठक में विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ रोजगार और स्वरोजगार के लिए जरूरी कौशल उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। एसीएस ने विद्यालयों में संचालित व्यावसायिक एवं कौशल आधारित पाठ्यक्रमों का विस्तार करने तथा दूरदराज और छोटे गांवों के विद्यालयों तक इनका लाभ पहुंचाने की आवश्यकता बताई। इसके साथ ही शिक्षकों और शिक्षा कार्मिकों के प्रशिक्षण को मजबूत करने के लिए प्रशिक्षण केंद्र एवं उत्कृष्टता केंद्र विकसित करने पर भी चर्चा हुई।

बैठक में विद्यार्थियों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य के लिए संस्थागत स्तर पर कार्यक्रम संचालित करने, विद्यालयों में विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति बढ़ाने और ड्रॉपआउट रोकने के उपायों पर विचार किया गया। कमजोर विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने तथा विद्यालयों के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता भी सामने रखी गई।

कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों में वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देने तथा चयनित सरकारी विद्यालयों को बेहतर सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ मॉडल विद्यालय के रूप में विकसित करने पर भी चर्चा हुई। विद्यालयों में समुदाय की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

राजेश कुमार यादव ने शिक्षा के क्षेत्र में कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से सहयोग बढ़ाने और निजी संस्थाओं एवं फाउंडेशन के साथ प्रभावी साझेदारी को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बताई। पीरामल फाउंडेशन के चेयरमैन अजय पीरामल ने राजस्थान में संस्था की ओर से किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली और चर्चा एवं सुझावों के अनुरूप सहयोग को और बढ़ाने का आश्वासन दिया।

राज्य परियोजना निदेशक एवं आयुक्त डॉ. रश्मि शर्मा ने समग्र शिक्षा के तहत संचालित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में जेंडर, स्वच्छता, आधारभूत ढांचे, योजनाओं की समयबद्ध तैयारी और नियमित निगरानी के साथ विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास, कौशल और रोजगार क्षमता पर समान रूप से ध्यान देने की आवश्यकता बताई।

आरएससीईआरटी निदेशक श्वेता फगड़िया ने विद्यार्थियों में व्यावसायिक उन्मुख कौशल विकसित करने, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार के लिए तैयार करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से बालिकाओं में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई, ताकि वे किशोरावस्था से जुड़े स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी विषयों को समझकर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।

बैठक के बाद अतिथियों ने पीरामल फाउंडेशन की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इसमें शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे विभिन्न विकास कार्यों, नवाचारों और सफल प्रयासों की जानकारी दी गई। अधिकारियों और अतिथियों ने शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी, आधुनिक और विद्यार्थियों के कौशल एवं रोजगार क्षमता से जोड़ने की दिशा में आगे की कार्ययोजना पर भी विचार किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित