अहोई अष्टमी पर महिलाएं संतान की खुशहाली के लिए रखेंगी व्रत

 


जयपुर, 31 अक्टूबर (हि.स.)। अहोई अष्टमी रविवार को मनाई जाएगी। रविपुष्य और सर्वार्थ सिद्धि योग के संयोग में महिलाएं व्रत रखेंगी। संतान की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के साथ महिलाएं व्रत रखेंगी। शाम को अहोई माता की पूजा करेंगी और तारों को अघ्र्य देकर संतान के कल्याण की कामना करेंगी। व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह स्नान के बाद संतान के कल्याण का संकल्प लेंगी। शाम को अहोई माता का चित्र स्थापित कर रोली, चावल, पुष्प, दीपक और नैवेद्य अर्पित किया जाएगा। इसके बाद अहोई अष्टमी की कथा सुनकर तारों को अघ्र्य दिया जाएगा। परिवारों में प्रचलित परंपरा के अनुसार व्रत का पारण किया जाएगा। कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 1 नवंबर को दोपहर 2:51 बजे से शुरू होकर 2 नवंबर को दोपहर 1:10 बजे तक रहेगी। व्रत की परंपरा के अनुसार 1 नवंबर को अहोई अष्टमी मनाई जाएगी। इस दिन रविवार और पुष्य नक्षत्र का संयोग रविपुष्य योग बनाएगा। सर्वार्थ सिद्धि योग भी धार्मिक कार्यों और शुभ संकल्पों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

ज्योतिषाचार्य पं. पुरुषोत्तम गौड़ ने बताया कि रविवार को चंद्रमा कर्क राशि में रहेंगे। चंद्रमा को मन, भावनाओं और मातृत्व का कारक माना जाता है। ऐसे में कर्क राशि में चंद्रमा की स्थिति को पारिवारिक जुड़ाव, भावनात्मक संवेदनशीलता और संतान के प्रति स्नेह की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। सूर्य तुला राशि में रहेगा, जबकि शुक्र भी तुला राशि में होने से संबंधों में सामंजस्य और सौहार्द से जुड़े ज्योतिषीय संकेतों की चर्चा रहेगी।

रविवार को गोविंद देवजी मंदिर में सुबह आठ से दस बजे तक निशुल्क पंच कुंडीय गायत्री महायज्ञ होगा। मंदिर महंत अंजन कुमार गोस्वामी महाराज के सान्निध्य में श्रद्धालु अपनी संतान की खुशहाली के लिए ठाकुरजी का पूजन कर यज्ञ में आहुतियां प्रदान कर सकेंगे। यज्ञ में कोई भी शामिल हो सकता है। इसके लिए कोई सामग्री लाने की आवश्यक्ता नहीं है। गायत्री परिवार के आचार्य यज्ञ संपन्न कराएंगे।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश