औषधि नियंत्रण टीम की कार्रवाई: अगस्त माह में 478 दवा नमूनों की जांच, 17 नमूने अमानक पाए गए

 


जयपुर, 02 सितंबर (हि.स.)। प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने बताया कि राज्य में आमजन को गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित औषधियां उपलब्ध कराने के उद्देश्य से औषधि नियंत्रण टीम द्वारा दवाओं की गुणवत्ता की नियमित निगरानी की जा रही है। इसी क्रम में अगस्त 2026 के दौरान बाजार में उपलब्ध दवाओं के 478 नमूने लेकर उनकी जांच की गई। इनमें से 17 नमूने अमानक पाए गए।

राठौड़ ने बताया कि जांच में बी-कॉम्प्लेक्स टेबलेट्स, कैल्शियम एवं विटामिन डी-3 टेबलेट्स, टेल्मिसार्टन एवं एम्लोडिपिन टेबलेट्स, बिलास्टाइन टेबलेट्स, अमॉक्सीसिलिन एवं पोटैशियम क्लावुलेनेट टेबलेट्स, ऑफ्लॉक्सासिन एवं ऑर्निडाजोल टेबलेट्स, ओंडानसेट्रॉन इंजेक्शन, डेक्सामेथासोन इंजेक्शन तथा बुपीवाकेन हाइड्रोक्लोराइड इन डेक्सट्रोज इंजेक्शन (बुपिकैन-हैवी) सहित 17 नमूने अमानक पाए गए।

उन्होंने बताया कि एनएसक्यू पाए गए नमूनों में बुपिकैन-हैवी इंजेक्शन के बैच नंबर बीकेबीपी 02601 के 7 नमूने शामिल हैं। इन नमूनों के संबंध में अन्य राज्यों में मरीजों में एडवर्स ड्रग रिएक्शन की सूचना प्राप्त होने पर विभाग द्वारा तत्काल कार्रवाई की गई। बाजार में उपलब्ध उक्त दवा के स्टॉक पर रोक लगाते हुए स्टॉक वापस मंगाने (रिकॉल) की कार्रवाई शुरू की गई।

उन्होंने बताया कि बुपिकैन-हैवी इंजेक्शन के 7 नमूने जयपुर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, झालावाड़ एवं कोटा से लिए गए थे। राजकीय विश्लेषक, औषधि परीक्षण प्रयोगशाला, जयपुर द्वारा की गई जांच में सभी 7 नमूने बैक्टीरियल एंडोटॉक्सिन की पुष्टि होने के कारण अमानक घोषित किए गए।

राठौड़ ने बताया कि अमानक घोषित किए गए नमूनों के संबंध में नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। औषधि नियंत्रण अधिकारी, जयपुर , गंगानगर,हनुमानगढ़ द्वारा बुपिकैन-हैवी के 12,228इंजेक्शन जब्त किए गए हैं। जब्त स्टॉक की अनुमानित कीमत करीब 4 लाख रुपये है।

आयुक्तऔषधि नियंत्रण अविचल चतुर्वेदी ने बताया कि इसके अतिरिक्त जैक्सन लेबोरेटरीज प्राइवेट लिमिटेड, अमृतसर द्वारा निर्मित बी-कॉम्प्लेक्स की 6,280 स्ट्रिप्स भी जब्त की गई हैं। इनकी अनुमानित कीमत 92,316 रुपये है। जांच में इस दवा में विटामिन बी1 तथा कैल्शियम डी -पैंटोथेनेट की मात्रा शून्य पाई गई।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में औषधियों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बाजार से नियमित रूप से दवा नमूने लेकर उनकी वैज्ञानिक जांच कराई जाती है। गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरने वाली दवाओं के निर्माताओं एवं संबंधित पक्षों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाती है, ताकि आमजन को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण औषधियां उपलब्ध कराई जा सकें।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश