एक लाइसेंस से पूरे देश में दौड़ेगी कंटेनर ट्रेन
जोधपुर, 10 अगस्त (हि.स.)। कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों के लिए भारतीय रेलवे ने लाइसेंस व्यवस्था को आसान कर दिया है। अब ऑपरेटरों को अलग-अलग मार्ग श्रेणियों के लिए अलग अनुमति और शुल्क नहीं देना होगा। 25 करोड़ रुपए के एकसमान पंजीकरण शुल्क पर सिंगल ऑल इंडिया लाइसेंस मिलेगा। इसके आधार पर ऑपरेटर भारतीय रेल नेटवर्क के सभी मार्गों पर कंटेनर ट्रेन चला सकेंगे।
नई व्यवस्था में लाइसेंस की मौजूदा मार्गवार श्रेणीकरण व्यवस्था समाप्त की जाएगी। इससे किसी नए मार्ग पर कंटेनर ट्रेन चलाने के लिए अलग लाइसेंस लेने की प्रक्रिया से ऑपरेटरों को राहत मिलेगी। रेलवे का उद्देश्य लाइसेंसिंग व्यवस्था को सरल और एकरूप बनाना है। कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर की कन्सेशन अवधि समाप्त होने के बाद संतोषजनक प्रदर्शन के आधार पर सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी से उसे 20 साल का विस्तार दिया जा सकेगा। इस विस्तार के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। भविष्य में दिए जाने वाले अन्य विस्तार पर भी विस्तार शुल्क नहीं होगा।
पुराने ऑपरेटरों को भी राहत
जोधपुर मंडल के सीनियर डीसीएम हितेश यादव के अनुसार कैटेगरी-1 के मौजूदा लाइसेंसधारी अपनी वर्तमान कन्सेशन अवधि पूरी होने तक परिचालन जारी रख सकेंगे। नई व्यवस्था के तहत नवीनीकरण या विस्तार के समय उनसे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। कैटेगरी-2, 3 और 4 के ऑपरेटरों को नई व्यवस्था में आने के लिए 15 करोड़ रुपए का भुगतान करना होगा। यह नए 25 करोड़ रुपए के शुल्क और उनके पहले से जमा 10 करोड़ रुपए के बीच का अंतर है। वे मौजूदा 20 साल की अवधि पूरी होने से पहले भी नई व्यवस्था में शामिल हो सकते हैं।
उद्योग और एमएसएमई को फायदा
सरल लाइसेंस व्यवस्था से ऑपरेटरों की नियामकीय और अनुपालन लागत कम होगी। निजी क्षेत्र की भागीदारी बढऩे से कंटेनर ट्रेन परिचालन का विस्तार होने की उम्मीद है। इससे उद्योगों, विशेषकर एमएसएमई, को माल ढुलाई के लिए अधिक दक्ष और लागत-प्रभावी रेल विकल्प मिलेगा। सडक़ से रेल की ओर कंटेनर यातायात बढऩे से हाईवे पर भीड़भाड़, ईंधन की खपत और कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी मदद मिलेगी। इससे देश में अधिक टिकाऊ और किफायती माल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश