पिंकसिटी में रंगों का महाकुंभ: चंग-ढाप और डीजे की धुन पर थिरके युवा, विदेशी मेहमान भी हुए सराबोर
जयपुर, 04 मार्च (हि.स.)। छोटी काशी में होली का रंगोत्सव इस बार दो दिन तक पूरे शबाब पर रहा। मंगलवार को शुरू हुआ रंगों का उत्सव बुधवार को और अधिक जोश, उमंग और जनसैलाब के साथ नजर आया। पिंक सिटी की फिजां मल्टीकलर हो गई और चारदीवारी के चौड़े रास्तों से लेकर संकरी गलियों तक गुलाल की बयार बहती रही।
सुबह से ही चौड़ा रास्ता, त्रिपोलिया, जौहरी बाजार और परकोटे की गलियां रंगों से सराबोर रहीं। कहीं चंग-ढाप की पारंपरिक थाप गूंज रही थी तो कहीं डीजे की धुन पर युवा जमकर थिरकते नजर आए। सड़क से लेकर मकानों की छतों तक गुलाल उड़ता रहा और पूरा इलाका कार्निवाल में तब्दील हो गया। पर्यटकों के लिए भी यह नजारा खास रहा। विदेशी मेहमानों ने स्थानीय युवाओं के साथ रंग-गुलाल खेलते हुए उत्सव में भागीदारी निभाई। कई विदेशी सैलानी पारंपरिक पगड़ी पहनकर और चेहरे पर गुलाल लगाए होली की मस्ती में डूबे नजर आए।
इधर आस्था के केंद्र गोविंद देव जी मंदिर में भी भक्तों का सैलाब उमड़ा। धूप-झांकी के दौरान श्रद्धालुओं ने ठाकुरजी के साथ होली खेली। मंदिर प्रशासन और पुलिस की ओर से सुरक्षा व भीड़ प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम किए गए। बेरिकेडिंग के जरिए श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन कराए गए, जिससे भीड़ एक स्थान पर एकत्रित नहीं हुई।
मंदिर के बाहर भी भक्तों ने पारंपरिक फाग गीतों पर नाचते-गाते हुए रंग-गुलाल उड़ाया। दोपहर में पट बंद होने के बाद भी श्रद्धालुओं का आना-जाना जारी रहा।
चारदीवारी क्षेत्र में उमड़ी भीड़ के चलते यातायात की रफ्तार पर भी असर पड़ा। कई मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन किया गया और वाहन रेंगते नजर आए। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था के बीच युवा बेफिक्र होकर उत्सव का आनंद लेते रहे। छतों से उड़ता गुलाल, सड़कों पर बहते रंग और हर चेहरे पर झलकती मुस्कान ने पिंक सिटी को रंगों के महासागर में बदल दिया। इस तरह जयपुर में होली एक बार फिर केवल पर्व नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और उल्लास का जीवंत महोत्सव बनकर सामने आई।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश