2026 का पहला चंद्र ग्रहण तीन मार्च को

 


जयपुर, 01 मार्च (हि.स.)। फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा मंगलवार 3 मार्च को वर्ष 2026 का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। खगोलीय दृष्टि से यह पूर्ण चंद्र ग्रहण है, हालांकि जयपुर सहित पश्चिमी भारत में इसका दृश्य प्रभाव आंशिक रहेगा। पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में यह पूर्ण रूप से दिखाई देगा,जबकि पश्चिमी भारत में चंद्रोदय के समय आंशिक अवस्था में ग्रहण के दर्शन होंगे।

ज्योतिषाचार्य बनवारी लाल शर्मा के अनुसार जयपुर में चंद्र ग्रहण का स्पर्श दोपहर बाद आरंभ होगा। चंद्रोदय के साथ ही आंशिक अवस्था में ग्रहण देखा जा सकेगा। जयपुर में स्थानीय दृश्य अवधि लगभग 13 मिनट 36 सेकंड रहेगी, जबकि पूर्णावस्था की कुल अवधि 57 मिनट 27 सेकंड बताई गई है। ग्रहण का परिमाण 1.14 रहेगा। चंद्र ग्रहण के कारण जयपुर में सूतक काल सुबह 9:44 बजे से प्रारंभ होकर शाम 6:46 बजे मोक्ष तक प्रभावी रहेगा। परंपरा अनुसार बच्चों, वृद्धों और रोगियों के लिए सूतक का प्रभाव दोपहर 3:34 बजे से माना गया है।

शर्मा के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा पर लगने वाला यह चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र से संबंधित प्रभाव उत्पन्न करेगा। चंद्रमा मन का कारक माना जाता है, इसलिए इस काल में मानसिक स्थिरता, संयम और भगवान के नाम का स्मरण विशेष फलदायी रहेगा।

धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण केवल वहीं प्रभावी माना जाता है जहां वह दृश्य हो। जयपुर में चंद्रमा उदय के समय ग्रहण आंशिक रूप से दृश्य रहेगा, इसलिए सूतक और धार्मिक नियमों का पालन किया जाएगा। परंपरा के अनुसार ग्रहण से पूर्व बने भोजन में तुलसी दल या कुश डालकर उसे सुरक्षित माना जाता है।जयपुर में ग्रहण मोक्ष के बाद गलता जी तीर्थ में स्नान की विशेष परंपरा रही है। श्रद्धालु सूर्यास्त के पश्चात और अगले दिन प्रातःकाल पवित्र कुंडों में स्नान कर दान-पुण्य करते हैं। मान्यता है कि ग्रहण के बाद पवित्र सरोवर में स्नान करने से नकारात्मक प्रभावों का शमन होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।

इसके अतिरिक्त शहर के विभिन्न मंदिरों और घरों में भी ग्रहण समाप्ति के बाद गंगाजल से शुद्धिकरण, धूप-दीप और विशेष आरती की जाती है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश