18 साल पुराना सपना हुआ साकार, 1008 जैन श्रद्धालु स्पेशल ट्रेन से निकले सम्मेद शिखरजी
बाड़मेर, 08 अक्टूबर (हि.स.)। भामाशाह रहे स्वर्गीय रिखबदास जैन का 18 साल पुराना सपना गुरुवार को साकार हो गया। उन्होंने अपने जैन समाज के लोगों को सम्मेद शिखरजी की तीर्थ यात्रा कराने का सपना देखा था। उनके बेटों मांगीलाल, रतनलाल और मालीवाल वडेरा ने जैन समाज के सहयोग से इस सपने को पूरा करते हुए 1008 जैन श्रद्धालुओं को विशेष ट्रेन से सम्मेद शिखरजी की यात्रा पर रवाना किया।
बाड़मेर रेलवे स्टेशन पर यात्रा को लेकर सुबह से ही श्रद्धालुओं और उनके परिजनों की भीड़ जुटी रही। विशेष ट्रेन को फूल-मालाओं से सजाया गया था। श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर और जैन तीर्थंकरों का स्मरण कर मंगल कामनाओं के साथ यात्रा शुरू की। स्टेशन पर जैन समाज के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया। कई श्रद्धालु इस अवसर पर भावुक नजर आए तो कई के चेहरे पर लंबे समय बाद तीर्थ दर्शन का अवसर मिलने की खुशी साफ दिखाई दी।
रतनलाल जैन ने बताया कि उनके पिता रिखबदास जैन ने वर्ष 2008 में इच्छा जताई थी कि बाड़मेर से जैन समाज के लोगों के लिए एक विशेष ट्रेन लेकर सम्मेद शिखरजी की यात्रा कराएंगे। लेकिन कुछ समय बाद उनका निधन हो गया और उनका सपना अधूरा रह गया। पिता की इच्छा को पूरा करने के लिए परिवार लगातार प्रयास करता रहा।
करीब आठ महीने की तैयारी के बाद यह सपना पूरा हो सका। देशभर से आए आवेदनों की जांच के बाद 1008 यात्रियों का चयन किया गया। इनमें बुजुर्गों, तपस्वियों और कठिन तप कर रहे श्रद्धालुओं को भी यात्रा में शामिल किया गया है।
यात्रा शुरू होने से पहले आयोजकों ने ट्रेन के चालक सहित रेलकर्मियों का साफा पहनाकर और माला पहनाकर सम्मान किया। इसके बाद जैन समाज के लोगों ने ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। स्टेशन पर हरी झंडी दिखाने के लिए समाज के लोगों के बीच बोली भी लगाई गई।
यह तीर्थ यात्रा करीब 15 दिन की होगी और इस दौरान विशेष ट्रेन लगभग 5500 किलोमीटर का सफर तय करेगी। श्रद्धालु हस्तिनापुर, वैष्णोदेवी, अयोध्या और बनारस सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों के दर्शन करते हुए सम्मेद शिखरजी पहुंचेंगे।
यात्रा सात राज्यों से होकर गुजरेगी।
आयोजकों के अनुसार पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए टिकट नहीं रखा गया है, जबकि इससे अधिक उम्र के सभी यात्रियों के लिए टिकट की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं का कहना है कि सम्मेद शिखरजी जैन समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ है और वहां जाने का अवसर मिलना सौभाग्य की बात है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित