सागर: मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम करने के लिए हुआ प्रशिक्षण कार्यक्रम
सागर, 23 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सागर जिले में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम करने और स्वास्थ्य सेवाओं को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने के उद्देश्य से गुरुवार को शासकीय महाविद्यालय केसली में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में कलेक्टर प्रतिभा पाल ने स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट और सख्त दिशा-निर्देश जारी किए।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य एवं समाज सेवा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। कार्यक्रम के दौरान सागर कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल, एसडीएम केसली राजनंदिनी शर्मा, जनपद सीईओ प्रतिष्ठा जैन, बीएमओ डॉ. मधुर जैन, जन भागीदारी समिति अध्यक्ष मनोज लोधी एवं उपस्थित अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों ने महाविद्यालय परिसर में पौधारोपण किया। अधिकारियों ने पौधों की सुरक्षा और देखभाल का संकल्प लेते हुए सभी को पर्यावरण के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा दी।
प्रशिक्षण को संबोधित करते हुए कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान हाई रिस्क (उच्च जोखिम) वाली महिलाओं की पहचान और उनकी निगरानी सबसे महत्वपूर्ण है।
उन्होंने निर्देश दिए कि ब्लड ट्रांसफ्यूजन की अनिवार्यता: यदि किसी हाई रिस्क गर्भवती महिला को इलाज के दौरान रक्त (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) की आवश्यकता होती है, तो यह संबंधित ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर और कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर की सीधी जिम्मेदारी होगी कि समय रहते मरीज को ब्लड उपलब्ध कराया जाए। स्वास्थ्य केंद्रों पर सुविधा: केवल ब्लड उपलब्ध कराना ही काफी नहीं है, बल्कि संबंधित हेल्थ फैसिलिटी (स्वास्थ्य केंद्र) पर ही सुरक्षित रूप से ब्लड ट्रांसफ्यूजन की प्रक्रिया भी पूरी की जानी चाहिए ताकि मरीज को किसी भी आपात स्थिति में भटकना न पड़े।
इस उच्चस्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला प्रशासन और ब्लॉक स्तर के प्रमुख अधिकारियों की सक्रिय सहभागिता रही। महाविद्यालयीन स्टाफ के साथ मैदानी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली एएनएम, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता तथा जिला एवं विकासखंड स्तर के अन्य विभागीय अधिकारी व कर्मचारी भी इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हुए।
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों ने एएनएम और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया कि वे अपने क्षेत्र में हर गर्भवती महिला का समय पर पंजीयन करें और हाई रिस्क मामलों को चिन्हित कर तुरंत उच्च अधिकारियों व डॉक्टरों को सूचित करें। समय पर लिया गया सही फैसला ही मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को रोकने में सबसे कारगर हथियार साबित होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे