मुनिराज प्रत्यक्षरत्नविजयजी ने चैत्य परिपाटी के साथ आर्यरक्षित धाम पहुंचकर आचार्यों से की क्षमापना

 


मंदसौर, 02 अक्टूबर (हि.स.)। पर्युषण पर्व के समापन के बाद जैन समाज के वार्षिक धार्मिक कर्तव्यों के क्रम में शुक्रवार को मंदसौर में चैत्य परिपाटी निकाली गई। त्रिस्तुतिक जैन श्वेताम्बर संघ, परम स्पर्श चातुर्मास समिति और राजेन्द्र जैन नवयुवक परिषद के आयोजन में निकली चैत्य परिपाटी में पं. पू. जैन संत मुनिराज श्री प्रत्यक्षरत्नविजयजी एवं श्री पवित्ररत्नविजयजी म. सा. की पावन निश्रा और प्रेरणा रही।

चैत्य परिपाटी का शुभारंभ जनकुपुरा स्थित श्री अजीतनाथ जैन मंदिर से बैंड-बाजे के साथ हुआ। यहां संघ के सदस्यों ने भगवान के दर्शन-वंदन किए। इसके बाद परिपाटी धानमंडी गली स्थित पार्श्व पद्मावती मंदिर पहुंची। धानमंडी में हिम्मतलाल संघवी परिवार की ओर से संघ पूजा की गई।

इसके बाद चैत्य परिपाटी धानमंडी, वीर सावरकर चौराहा और पशुपतिनाथ की पुलिया होते हुए चंद्रपुरा स्थित आर्यरक्षित जैन तीर्थ धाम पहुंची। यहां मुनिराज श्री प्रत्यक्षरत्नविजयजी सहित पूरे श्रीसंघ ने आचार्य श्री अशोकसागरसूरिश्वरजी म. सा., आचार्य श्री सागरचंद्रसागरसूरिश्वरजी म. सा. सहित पांचों जैन आचार्यों, मुनि भगवंतों और साध्वी मंडल से संवत्सरी क्षमापना की।

आर्यरक्षित जैन तीर्थ धाम में श्रद्धालुओं ने महा उवसग्गहरं पार्श्वनाथ की प्रतिमा सहित विभिन्न जिन प्रतिमाओं के दर्शन-वंदन कर धर्मलाभ लिया। इस अवसर पर आर्यरक्षित तीर्थ धाम में नवकारसी का भी आयोजन किया गया। चैत्य परिपाटी के दौरान बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता की और पर्युषण पर्व के समापन के बाद धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया।

हिन्दुस्थान समाचार / अशोक झलोया