भांडेर के प्राचीन कुएं-बावड़ियां उपेक्षा की भेंट, संरक्षण के अभाव में सिमट रही जल विरासत
दतिया, 20 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के दतिया जिले के भांडेर नगर में स्थित प्राचीन कुएं, बावड़ियां और पारंपरिक जलस्रोत संरक्षण के अभाव में बदहाल होते जा रहे हैं। कभी नगर की जलापूर्ति का प्रमुख आधार रहे ये ऐतिहासिक जलस्रोत आज गंदगी, झाड़ियों, अतिक्रमण और रखरखाव की कमी के कारण अपना अस्तित्व खोने की कगार पर पहुंच गए हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर परिषद भांडेर द्वारा इन ऐतिहासिक जलस्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन की दिशा में प्रभावी पहल नहीं की जा रही है। जबकि शासन स्तर पर समय-समय पर जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और पारंपरिक जलस्रोतों के पुनर्जीवन को लेकर विभिन्न अभियान संचालित किए जाते रहे हैं।
नगर के कई प्राचीन कुएं और बावड़ियां वर्तमान में कचरे से भरे हुए हैं। अनेक स्थानों पर झाड़ियां उग आई हैं, जबकि कुछ स्थानों पर अतिक्रमण भी हो चुका है। नियमित सफाई और मरम्मत नहीं होने से इनकी स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। कई जलस्रोतों की सुरक्षा दीवारें और सीढ़ियां भी क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इन प्राचीन जलस्रोतों का संरक्षण और पुनर्जीवन किया जाए तो इससे नगर की ऐतिहासिक धरोहर सुरक्षित रहने के साथ-साथ भूजल स्तर बढ़ाने और वर्षा जल संचयन में भी मदद मिल सकती है। उनका कहना है कि वर्तमान समय में बढ़ते जल संकट को देखते हुए पारंपरिक जलस्रोतों के संरक्षण की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है।
नागरिकों ने नगर परिषद और संबंधित विभाग से मांग की है कि नगर के प्राचीन कुओं और बावड़ियों का सर्वे कर उनकी साफ-सफाई, मरम्मत, अतिक्रमण हटाने और संरक्षण के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस ऐतिहासिक जल विरासत को सुरक्षित रखा जा सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा