दिग्विजय सिंह की सनातन यात्रा को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दिया समर्थन

 


भोपाल, 16 अक्टूबर (हि.स.)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ को ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का समर्थन मिला है। यह पदयात्रा 20 अक्टूबर को विजयदशमी के अवसर पर उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होकर अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर तक जाएगी। दिग्विजय सिंह ने शुक्रवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन संदेश साझा किया।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने संदेश में महाकाल धाम से श्रीराम धाम तक प्रस्तावित पदयात्रा को सनातन धर्म और धर्म-स्वाभिमान के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर हो रहे अधर्म और देवस्थलों की पवित्रता तथा व्यवस्थाओं में मौजूद खामियों के प्रति समाज को जागरूक करना जरूरी है।

उन्होंने यात्रा की सफलता की कामना करते हुए कहा कि भगवान महाकालेश्वर और प्रभु श्रीराम की कृपा से दिग्विजय सिंह और उनके सभी सहयात्रियों की पदयात्रा बिना किसी बाधा के पूरी हो। साथ ही उन्होंने सनातन धर्म के वास्तविक स्वरूप की विजय की कामना की।

ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम हिमालय की ओर से जारी संदेश में कहा गया है कि दिग्विजय सिंह अपने साथियों के साथ धर्म के नाम पर हो रहे अधर्म और भगवान श्रीराम के मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मुद्दे पर जनजागरण के उद्देश्य से यह यात्रा निकाल रहे हैं। संदेश में धर्म की रक्षा, सत्यनिष्ठा और जनजागरण के संकल्प के लिए दिग्विजय सिंह तथा उनके सहयोगियों को शुभकामनाएं दी गई हैं।

संदेश में सनातन धर्म को सत्य, अहिंसा, पवित्रता, नीति और देवालयों की मर्यादा से जुड़ा शाश्वत धर्म बताया गया है। इसमें कहा गया है कि धर्म के नाम पर होने वाला अनाचार और असत्य सनातन धर्म का वास्तविक स्वरूप नहीं हो सकता। देवस्थलों की गरिमा बनाए रखने और श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित सामग्री के सम्मान की रक्षा करना भी धर्म-स्वाभिमान का हिस्सा है।

दिग्विजय सिंह की यह पदयात्रा उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होकर अयोध्या के श्रीराम मंदिर तक प्रस्तावित है। यात्रा के माध्यम से धार्मिक स्थलों की व्यवस्था, उनकी पवित्रता और धर्म के नाम पर कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दों पर लोगों को जागरूक करने की बात कही गई है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन से इस यात्रा को धार्मिक और राजनीतिक, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा