झाबुआ: प्रत्येक व्यक्ति के लिए अपने मौलिक अधिकारों और कानूनी प्रावधानों के प्रति सजगता आवश्यक- न्यायाधीश शिवकुमार डावर

 


झाबुआ, 15 जुलाई (हि.स.)। कानून की अनभिज्ञता किसी भी नागरिक के लिए नुकसानदेह हो सकती है, इसलिए हर व्यक्ति को अपने मौलिक अधिकारों और कानूनी प्रावधानों के प्रति सजग रहना आवश्यक है।

यह बात जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव शिव कुमार डावर ने मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले की ग्राम पंचायन बन में नालसा एवं सालसा की योजनाओं सहित सामुदायिक मध्यस्थता विषय पर आयोजित साक्षरता एवं जागरूकता शिविर को संबोधित करते हुए अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में आज बुधवार को कही।

शिविर मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशानुसार तथा प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, श्रीमती आशिता श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। शिविर में जिला विधिक सहायता अधिकारी जयदेव माणिक भी मौजूद रहे।

अपने संबोधन में डावर ने कानून की जानकारी को आवश्यक बताया, और इसका महत्व निरुपित करते हुए कहा कि कानून की अनभिज्ञता किसी भी नागरिक के लिए नुकसानदेह हो सकती है, इसलिए हर व्यक्ति को अपने मौलिक अधिकारों और कानूनी प्रावधानों के प्रति सजग रहना आवश्यक है। उन्होंने नालसा की विभिन्न जनकल्याणकारी और निःशुल्क कानूनी सहायता योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि अदालतें केवल सजा देने के लिए नहीं, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को न्याय दिलाने के लिए भी काम करती हैं।

डावर ने अपने उद्बोधन में आगे कहा कि सामाज में व्याप्त बाल विवाह जैसी कुप्रथाएं बच्चों के भविष्य और उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हैं। उन्होंने ग्रामीणों से आह्वान किया कि वे बाल विवाह को पूरी तरह रोके और यदि कहीं ऐसा होता दिखे, तो तुरंत इसकी सूचना प्रशासन को दें।

डाबर ने नशा उन्मूलन पर बल देते हुए कहा कि नशा केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे परिवार और आने वाली पीढ़ी को भी बर्बाद कर देता है। नशे की लत से अपराध बढ़ते हैं, इसलिए एक स्वस्थ और अपराध मुक्त समाज के निर्माण के लिए नशे के खिलाफ सामूहिक जंग छेड़नी होगी।

न्यायाधीश ने विवादों के त्वरित और शांतिपूर्ण निपटारे के लिए सामुदायिक मध्यस्थता के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि हर छोटे-मोटे विवाद को लेकर अदालत आने के बजाय ग्रामीण स्तर पर ही आपसी समझ और मध्यस्थता से मामलों को सुलझाना सबसे उत्तम मार्ग है, इससे समय और पैसे दोनों की बचत होती है। आधुनिक युग की चुनौतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने शिविर में उपस्थित स्कूली छात्र छात्राओं और ग्रामीणों को आईटी सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के बारे में भी सचेत किया। उन्होंने कहा कि मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते प्रयोग के बीच साइबर अपराध बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक ओटीपी, पासवर्ड या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें, और सोशल मीडिया का उपयोग बेहद जिम्मेदारी के साथ करें।

शिविर में जिला विधिक सहायता अधिकारी जयदेव माणिक ने महिला कानून, नालसा डॉन, साथी, जागृति, संवाद, आशा, असंगठित क्षेत्र के श्रमिक और गरीबी उन्मूलन आदि की जानकारी दी। उक्त शिविर में ग्राम सरपंच एवं सचिव, स्कूल प्राचार्य, जनपद पंचायत के अधिकारीगण, एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन एवं स्कूली छात्र एवं छात्राऐं उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. उमेश चंद्र शर्मा