अनूपपुर: नर्मदा संरक्षण कार्यशाला: अमरकंटक में उद्गम स्थलों के पास निर्माण पर रोक
अनूपपुर, 04 नवंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के अमरकंटक में बुधवार को नर्मदा नदी के उद्गम क्षेत्र के संरक्षण को लेकर कार्यशाला में प्रशासनिक अधिकारियों, पर्यावरणविदों, संतों और नागरिकों ने क्षेत्र की प्राकृतिक संरचना और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के सुझाव दिए। एसडीएम पुष्पराजगढ़ वसीम अहमद भट्ट ने बताया कि एनजीटी के दिशा-निर्देशों के मुताबिक नर्मदा और सोन नदी के उद्गम स्थलों के 300 मीटर के दायरे में नए निर्माण पर पूरी तरह रोक है।
कार्यशाला में उद्गम क्षेत्र में अनियंत्रित निर्माण, वनों की कटाई, पहाड़ों के कटाव, गंदे पानी और प्लास्टिक प्रदूषण पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने कहा कि क्षेत्र की प्राकृतिक संरचना और पर्यावरण संतुलन बनाए रखना जरूरी है। एसडीएम वसीम अहमद भट्ट ने कहा कि 300 मीटर के दायरे में नए निर्माण पर रोक से उद्गम क्षेत्र की प्राकृतिक संरचना और पर्यावरण संतुलन सुरक्षित रहेगा।
नदी में प्रदूषण रोकने के लिए जमुनधार समेत अन्य नालों के गंदे पानी को सीवर लाइन से जोड़कर साफ करने पर जोर दिया गया। साथ ही कंक्रीट की सड़कें बनाने से बचने और वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था जरूरी करने की बात कही गई। अमरकंटक को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए सामूहिक प्रयास की अपील भी की गई।
संत श्री रामभूषण जी महाराज और जगदीशानंद जी महाराज ने नर्मदा संरक्षण को आध्यात्मिक जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि विकास ऐसा होना चाहिए, जिससे प्रकृति को नुकसान न पहुंचे।
नर्मदा समग्र भोपाल के सीईओ डॉ. कार्तिक सप्रे ने बताया कि अमरकंटक में नर्मदा की सात प्रमुख सहायक नदियां हैं और कुल 41 सहायक नदियां हैं। उन्होंने कहा कि घने जंगल, पहाड़ और प्राकृतिक जलग्रहण क्षेत्र नर्मदा के लगातार बहाव के मुख्य आधार हैं।
डॉ. संतोष शुक्ला ने कहा कि जमीन पर मौजूद प्राकृतिक घास और वनस्पतियां पानी रोकने में मदद करती हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के डॉ. अखिलेश तिवारी और डॉ. तरुण ने संसाधनों का सीमित उपयोग करने और वर्ष 2022 की विकास योजनाओं को पारदर्शी तरीके से लागू करने पर जोर दिया।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला