अनूपपुर: जगद्गुरु शंकराचार्य ने मां नर्मदा को किया नमन, पूजन अर्चन कर लिया आशीर्वाद

 




- नर्मदा मंदिर में पुजारियों ने किया विशेष सम्मान, श्री मार्कंडेय आश्रम में हुआ पादुका पूजन

अनूपपुर, 05 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित मां नर्मदा की उद्गम स्थली अमरकंटक में सोमवार को द्वारका शारदा पीठाधीश्वर अनंत श्री विभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज ने मां नर्मदा मंदिर में विधिवत दर्शन-पूजन किया। जगद्गुरु के मंदिर पहुंचने पर पुजारियों एवं सेवायतों द्वारा परंपरागत रूप से उनका विशेष सम्मान किया गया।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां नर्मदा का विशेष पूजन-वाचन संपन्न कराया। साथ में श्री मार्कंडेय आश्रम के अग्निपीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर ब्रह्मऋषि स्वामी रामकृष्णानंद जी महाराज तथा स्वामी नर्मदानंद जी महाराज भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

जगद्गुरु शंकराचार्य ने मां नर्मदा के पावन उद्गम का दर्शन कर पूजा-अर्चना की और मां नर्मदा से लोककल्याण की कामना करते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया। उनके सान्निध्य में संपन्न धार्मिक अनुष्ठान ने अमरकंटक की आध्यात्मिक गरिमा को और अधिक व्यापकता प्रदान की। नर्मदा मंदिर में पूजन-अर्चन के पश्चात जगद्गुरु शंकराचार्य श्री मार्कंडेय आश्रम पहुंचे। जहां आश्रम के आचार्य महामंडलेश्वर ब्रह्मऋषि स्वामी रामकृष्णानंद जी महाराज के शिष्यों ने श्रद्धापूर्वक उनका स्वागत किया। आश्रम परिसर में वैदिक परंपरानुसार पादुका पूजन किया गया। श्रद्धालुओं ने पूरी आस्था के साथ पादुकाओं का पूजन कर संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया।

शिष्यों ने श्रद्धाभाव से किया पादुका पूजन

श्री मार्कंडेय आश्रम में आयोजित पादुका पूजन में राम नरेश दुबे एवं गिरिजा शंकर पाण्डेय सपरिवार उपस्थित रहे। उन्होंने श्रद्धापूर्वक पूजन-अर्चन कर जगद्गुरु शंकराचार्य एवं संत-महात्माओं का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर आश्रम में शंकराचार्य के सान्निध्य और संतों की उपस्थिति ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया। सनातन परंपरा में गुरु की पादुकाओं को श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक माना गया है। इसी भाव के साथ श्रद्धालुओं ने पादुका पूजन में सहभागिता की।

मां नर्मदा के पावन दर्शन से लेकर श्री मार्कंडेय आश्रम में पादुका पूजन तक पूरा आयोजन सनातन संस्कृति और संत परंपरा की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करता रहा। एक ओर नर्मदा मंदिर में वैदिक मंत्रों की गूंज सुनाई दी तो दूसरी ओर आश्रम परिसर में गुरु-भक्ति और श्रद्धा का वातावरण दिखाई दिया।

जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज की अमरकंटक यात्रा को श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण अवसर बताया। मां नर्मदा की पावन धरा पर संतों के इस संगम ने अमरकंटक की धार्मिक एवं आध्यात्मिक पहचान को और अधिक सशक्त किया।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला