झाबुआ: जल आपदा प्रबंधन को लेकर एनडीआरएफ एवं एसडीईआरएफ का बहादुर सागर तालाब पर वाटर फ्लड रेस्क्यू डेमोंस्ट्रेशन

 










झाबुआ, 13 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के जनजातीय बाहुल्य झाबुआ जिला मुख्यालय स्थित बहादुर सागर तालाब पर मंगलवार को आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तत्वाधान में एनडीआरएफ एवं एसडीईआरएफ की संयुक्त टीम द्वारा जल आपदा प्रबंधन से संबंधित वाटर फ्लड रेस्क्यू डेमोंस्ट्रेशन का आयोजन किया गया। इस डेमोंस्ट्रेशन का उद्देश्य बाढ़ एवं जल आपदा की स्थिति में त्वरित, सुरक्षित एवं प्रभावी राहत-बचाव कार्यों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना रहा। कार्यक्रम के दौरान तालाब में बने टापू पर बाढ़ के दौरान फँसे व्यक्तियों के रेस्क्यू, राहत एवं बचाव कार्यों का लाइव प्रदर्शन कर विभिन्न परिस्थितियों में अपनाई जाने वाली तकनीकों को व्यवहारिक रूप से समझाया गया।

11वीं वाहिनी एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडेंट राम भवन सिंह यादव द्वारा डेमोंस्ट्रेशन की संपूर्ण जानकारी देते हुए जल आपदा के समय रेस्क्यू की प्राथमिकताओं, सावधानियों एवं मानक संचालन प्रक्रियाओं पर प्रकाश डालते हुए प्रदर्शन के दौरान टापू पर फँसे लोगों को सुरक्षित किनारे लाने की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से दिखाया गया। साथ ही डूबती नाव से तीन अलग-अलग प्रकार के विक्टिम के रेस्क्यू की तकनीकों का भी प्रदर्शन किया गया, जिसमें तैर सकने वाले व्यक्ति को किनारे से ड्राई रेस्क्यू, थोड़ा तैरना जानने वाले व्यक्ति को लाइफ बॉय के माध्यम से सुरक्षित निकालना तथा डूब रहे व्यक्ति को प्रशिक्षित गोताखोर की सहायता से रेस्क्यू करने की प्रक्रिया।

डेमोंस्ट्रेशन के दौरान आर्टिफिशियल सर्वाइवल डेवाइस के महत्व को भी रेखांकित किया गया। बताया गया कि लाइफ जैकेट, लाइफ बॉय, रेस्क्यू ट्यूब, इन्फ्लेटेबल ट्यूब, टायर ट्यूब, खाली प्लास्टिक बोतलें एवं ड्रम जैसे मानवनिर्मित तैरने वाले उपकरण जल या बाढ़ आपदा के समय व्यक्ति को पानी की सतह पर बनाए रखकर रेस्क्यू होने तक जीवन रक्षा में सहायक होते हैं। ये उपकरण घबराहट कम करने, ऊर्जा की बचत करने तथा रेस्क्यूअर एवं पीड़ित दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे सीमित संसाधनों में भी प्रभावी बचाव संभव हो पाता है।

कार्यक्रम के अंत में सीपीआर की संपूर्ण तकनीक का भी विस्तृत प्रदर्शन किया गया, जिसे एनसीसी कैडेट्स के माध्यम से दोहराकर अभ्यास कराया गया। इस अभ्यास के माध्यम से आपदा या दुर्घटना की स्थिति में प्राथमिक जीवन रक्षक सहायता प्रदान करने के महत्व को समझाया गया, जिससे आपदा के समय सतर्कता, समन्वय एवं सही तकनीक के उपयोग का संदेश प्रसारित हुआ।

डेमोंस्ट्रेशन के दौरान डिप्टी कलेक्टर सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी, डिस्ट्रिक्ट कमांडेट शशीधर पिल्लई, एनडीआरएफ एवं एसडीईआरएफ की टीम, सिविल डिफेंस, एनसीसी कैडेट्स, स्कूली छात्र छात्राएं एवं नागरिक गण मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. उमेश चंद्र शर्मा