जल संकट पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का सरकार पर निशाना, कहा- जनता को भाषण नहीं, पीने का पानी चाहिए

 


भोपाल, 30 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के कई जिलों में गहराते जल संकट को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से जल संकट की चिंताजनक तस्वीरें सामने आ रही हैं और लोगों को पेयजल के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

उमंग सिंघार ने शनिवार काे प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए बयान में कहा कि प्रदेश की जनता को भाषण नहीं, बल्कि पीने का पानी और बेहतर व्यवस्थाएं चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जल संकट से प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत और स्थायी समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की। नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, रीवा, सतना, मुरैना, शिवपुरी, खरगोन, बड़वानी और धार सहित प्रदेश के कई जिलों में पेयजल संकट की स्थिति बनी हुई है। उनके अनुसार ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में महिलाएं एवं बच्चे दूर-दराज के स्रोतों से पानी लाने को मजबूर हैं।

उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों से ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जहां बच्चे और ग्रामीण गड्ढों में उतरकर पानी निकालने का जोखिम उठा रहे हैं। सिंघार ने इसे प्रशासनिक व्यवस्थाओं की कमी का परिणाम बताया।

योजनाओं के क्रियान्वयन पर उठाए सवाल

नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने कहा कि सरकार ने जल जीवन मिशन और ग्रामीण पेयजल योजनाओं के लिए हजारों करोड़ रुपये के प्रावधान और खर्च का दावा किया है, लेकिन कई क्षेत्रों में लोगों को अभी भी पर्याप्त पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। उन्होंने इन योजनाओं के क्रियान्वयन और जमीनी स्तर पर उनकी स्थिति को लेकर सवाल उठाए।

कर्ज और विकास कार्यों को लेकर भी की टिप्पणी

नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य पर बड़ा कर्ज होने के बावजूद आम नागरिकों को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जनता अब योजनाओं और खर्च के वास्तविक परिणाम जानना चाहती है। सिंघार ने कहा कि मौसम विभाग ने पहले ही अधिक गर्मी पड़ने की संभावना जताई थी, ऐसे में पेयजल संकट से निपटने के लिए अग्रिम तैयारी की जानी चाहिए थी। उन्होंने सरकार से प्रभावित क्षेत्रों में वैकल्पिक जल आपूर्ति, टैंकर व्यवस्था और दीर्घकालिक जल संरक्षण योजनाओं को प्राथमिकता देने की मांग की।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे