परियोजना कार्यालय में वाहनों का हो रहा नियम विरूद्ध भुगतान, परियोजना कार्यालय के संचालन पर उठाये सवाल

 


श्योपुर, 04 फ़रवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग में चल रहे गड़बड़झाले को लेकर श्योपुर के कांग्रेस विधायक बाबू जण्डेल ने विधानसभा में कई गंभीर प्रश्न लगाये हैं।

गत 31 जनवरी 2026 को विधानसभा में लगाये गये प्रश्नों में विधायक बाबू जण्डेल ने उल्लेख किया है कि श्योपुर जिले में महिला एवं बाल विकास द्वारा गंभीर अनियमितताऐं बरती जा रही है। यहां वाहनों का नियम विरूद्ध संचालन व भुगतान कर लाखों रूपये की हेरा-फेरी की जा रही है। इतना ही नहीं आंगनबाड़ी सुपरवाईजरों को मुख्यालयों पर निवास करने के नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। विधायक ने सवाल किये हैं कि परियोजना कार्यालयों का पृथक से कार्यालय होने के बाद भी सालों से तीनों परियोजनाओं का संचालन जिला मुख्यालय से ही किया जा रहा है।

जिले में चल रही 9 गाड़ियां

महिला बाल विकास में वर्तमान में 9 वाहन संचालित है। प्रतिवाहन का 37500 रूपये प्रतिमाह भुगतान हो रहा है। ग्रामीण-1 एवं ग्रामीण-2 परियोजना का प्रभार पवनजीत अरोरा पर है। उक्त परियोजना में दो गाडी लगी हुई है, दोनों का भुगतान हो रहा है। यहां सवाल यह है कि एक व्यक्ति द्वारा दो-दो वाहनों का उपयोग कैसे किया जा रहा है? जबकि सभी वाहन बिना टेंडर प्रक्र्रिया के लगाये गये हैं, जिनका टेक्सी परिमिट भी नहीं है।

श्योपुर में संचालित हो रहा बड़ौदा परियोजना कार्यालय

ग्रामीण-2 बडौदा परियोजना का संचालन निमयानुसार बड़ौदा में होना चाहिए, लेकिन उक्त परियोजना श्योपुर से ही संचालित हो रही है। ऐसे में बड़ौदा क्षेत्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बेवजह ही जिला मुख्यालय तक दौड़ लगानी पड़ती है। इसके अलावा जिले में 41 सेक्टर बने हुए है, जिन पर नियमानुसार सुपरवाईजरों को निवास करना चाहिए, लेकिन सभी सुपरवाईजर या तो परियोजना या जिला मुख्यालय पर निवास कर रही हैं, जिन्हें देखने वाला कोई नहीं है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत वैष्‍णव