राजगढ़ः वेद,पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन अनिवार्य-कलेक्टर

 


राजगढ़, 1 दिसम्बर (हि.स.)। वेद, पुराण जैसे हमारे प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन अनिवार्य है, क्योंकि यह हमारी जड़ों और संस्कृति का आधार है। गीता जी सनातन संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग है इसके 18 अध्यायों में ज्ञान, भक्ति, कर्म और योग का सार समाहित है।

यह बात कलेक्टर डाॅ.गिरीशकुमार मिश्रा ने सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कही। इस अवसर पर परिसर का अंदिरवास अत्यंत सुंदर सजाया गया, जिससे पूरे समय स्थल पर एक दिव्य, शांत और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। कलेक्टर डाॅ. मिश्रा द्वारा कार्यक्रम में पधारे संत-साधुओं का शाॅल व श्रीफल से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में कलेक्टर ने कहा कि कर्म करो, फल की चिंता मत करो, गुरुजनों का सम्मान करो यही जीवन की सबसे बड़ी शिक्षा है। कलेक्टर ने सरकार की इस पहल को समाज को जीवन-मूल्य प्रदान करने वाली उत्कृष्ट पहल बताया। कार्यक्रम में पूर्व विधायक रघुनंदन शर्मा ने कहा कि गीता जी में भगवान श्रीकृष्ण का उपदेश जब-जब पाप बढ़ता है, तब-तब मैं जन्म लेता हूं आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक है। इस अवसर भाजपा जिला अध्यक्ष ज्ञानसिंह गुर्जर ने कहा कि हमें अपने संस्कार, जड़ों और मूल्यों से जुड़ना होगा तभी एक विकसित राष्ट्र का निर्माण संभव है। कार्यक्रम में मौजूद जनप्रतिनिधि, अधिकारी, छात्र-छात्राओं,संत-पुजारियों ने श्रीमद्भागवत गीता के 15 वंे अध्याय के दिव्य श्लोंकों का सामूहिक पाठ किया। कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर डाॅ.गिरीशकुमार मिश्रा को श्रीमद्भागवत गीता को राष्ट्रीय गं्रथ घोषित करने के लिए ज्ञापन सौंपा गया। कार्यक्रम में सीईओ जिला पंचायत इच्छित गढ़पाले, डिप्टी कलेक्टर ज्योति राजोरे, एसडीएम निधि भारद्वाज, सीएचएमओ डाॅ.शोभा पटेल, जनप्रतिनिधि,अधिकारी-कर्मचारीगण सहित छात्र-छात्राएं मौजूद रही। इस अवसर जिला जेल राजगढ़ में निरुद्ध समस्त बंदी व स्टाफ द्वारा गीता जी के 15 वें अध्याय का वाचन किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / मनोज पाठक