सागर: 'जनमानस का केंद्र बिंदु, वंदे मातरम विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन
सागर, 03 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सागर स्थित शासकीय कला एवं वाणिज्य अग्रणी महाविद्यालय में गुरुवार को 'पीएम उषा' सॉफ्ट कंपोनेंट परियोजना के अंतर्गत जनमानस का केंद्र बिंदु, वंदे मातरम विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम वंदे मातरम् के 150वें जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में युवाओं को भारत के स्वाधीनता आंदोलन और राष्ट्रीय एकीकरण में इस राष्ट्रगीत की ऐतिहासिक भूमिका से अवगत कराने के उद्देश्य से आयोजित हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, पुष्पांजलि और सरस्वती वंदना के साथ हुआ। अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्रम और स्मृति चिह्न भेंट कर किया गया।
विधायक शैलेंद्र कुमार जैन (मुख्य अतिथि) ने कहा कि वंदे मातरम महज एक गीत नहीं, बल्कि भारत माता की पावन स्तुति और राष्ट्र चेतना का मुख्य उद्घोष है। स्वतंत्रता संग्राम में यह विचारों और अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त माध्यम बना। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को पूरी निष्ठा के साथ कंठस्थ करने का आह्वान किया।
कुलगुरु प्रो. विनोद कुमार मिश्र (अध्यक्षता) ने कहा कि इतिहास ही राष्ट्र की वास्तविक नींव है। 'वंदे मातरम्' और 'भारत माता की जय' स्वाभिमान एवं एकात्मभाव की अभिव्यक्ति हैं, जिन्होंने बंग-भंग आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय एकता को मजबूती दी।
सुनील देव (मुख्य वक्ता) ने वंदे मातरम के ऐतिहासिक संदर्भों को रेखांकित करते हुए बताया कि 1896 के कांग्रेस अधिवेशन और 1905 के स्वदेशी आंदोलन में इस गीत ने जन-जागरण और क्रांति की चेतना का कार्य किया। राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय चरित्र निर्माण से ही भारत विश्वगुरु बनेगा।
महंत केशवगिरी महाराज ने युवाओं को कर्तव्यों पर आत्ममंथन करने और वरिष्ठजनों के अनुभवों से सीखकर आगे बढ़ने की सलाह दी।
कार्यक्रम के दौरान राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'एकात्म मानव दर्शन विकसित : भारत 2047' का विमोचन किया गया। साथ ही स्वतंत्रता दिवस की जिला स्तरीय परेड में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली एनसीसी यूनिट्स और महाविद्यालय में आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेता छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया।
प्रथम वैचारिक सत्र: वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जी.एस. चौबे की अध्यक्षता में आयोजित सत्र में स्वतंत्रता सेनानियों के संस्मरण साझा किए गए। डॉ. कमलेश दुबे, डॉ. नीलिमा पिंपलापुरे और डॉ. शोभा सराफ ने वंदे मातरम के विभिन्न आयामों पर अपने विचार रखे।
द्वितीय वैचारिक सत्र एवं कवि सम्मेलन: प्रसिद्ध गांधीवादी विचारक पं. शुकदेव प्रसाद तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित इस सत्र में स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वंदे मातरम के प्रतिरोध और समर्पण के महत्व पर चर्चा हुई। इसके बाद आयोजित कवि सम्मेलन में अशोक मिज़ाज़, आदर्श दुबे, पुष्पेंद्र दुबे, नलिन जैन, ऊषा वर्मन, शशि दीक्षित, रितु त्रिपाठी, डॉ. शुचिता अग्रवाल और छात्रा प्रतिमा दांगी ने काव्य पाठ किया।
समापन सत्र में अतिथि वुमन राइट्स संस्था की प्रदेश अध्यक्ष अनुश्री शैलेंद्र जैन ने कहा कि जन्मभूमि जननी से भी बढ़कर है। उन्होंने वंदे मातरम से संबंधित क्विज प्रतियोगिता आयोजित कर सही उत्तर देने वाले विद्यार्थियों को व्यक्तिगत रूप से उपहार देकर पुरस्कृत किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकों, एनसीसी कैडेट्स और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की सहभागिता रही। इस आयोजन ने युवाओं में राष्ट्रीय एकता, स्वाभिमान और गौरवशाली इतिहास के प्रति गहरी जागरूकता का संचार किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे