सतना के मझगवां ब्लॉक में कुपोषण से बच्ची की मौत, लापरवाही बनी जानलेवा

 


सतना, 23 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सतना जिले के मझगवां ब्लॉक से कुपोषण की गंभीर और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। सुरंगी गांव में चार महीने की मासूम बच्ची प्रियांशी की मौत हो गई, जबकि उसका जुड़वां भाई अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है। इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था और पोषण तंत्र की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, प्रियांशी और उसके जुड़वां भाई नैतिक का जन्म 21 दिसंबर 2025 को मझगवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुआ था। जन्म के समय प्रियांशी का वजन 2 किलो और नैतिक का 1.90 किलो था। चार महीने की उम्र तक बच्चों का वजन सामान्य रूप से 4 से 5 किलो होना चाहिए, लेकिन अस्पताल में भर्ती के समय प्रियांशी का वजन मात्र 2.86 किलो और नैतिक का 2.93 किलो पाया गया। दोनों बच्चों को गंभीर कुपोषण की श्रेणी में रखा गया।

परिजनों ने बताया कि मां विमला प्रजापति शारीरिक रूप से कमजोर होने के कारण बच्चों को स्तनपान नहीं करा पा रही थीं। ऐसे में बच्चों को गाय और बकरी का दूध दिया जा रहा था। बीते 15 दिनों से दोनों बच्चे उल्टी, दस्त और बुखार से पीड़ित थे। परिवार उन्हें अस्पताल ले जाने के बजाय जुगुलपुर के एक झोलाछाप डॉक्टर के पास ले जाता रहा। हालत बिगड़ने पर 21 अप्रैल को दोनों बच्चों को मझगवां सीएचसी लाया गया, जहां से जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।

जिला अस्पताल के पीआईसीयू में इलाज के दौरान 22 अप्रैल को प्रियांशी की हालत गंभीर हो गई। रीवा रेफर करने की तैयारी के बीच उसकी मौत हो गई। वहीं, नैतिक का उपचार जारी है।

मृत बच्ची के मामा ललित चक्रवर्ती ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि परिवार को टीकाकरण के अलावा आंगनबाड़ी या आशा कार्यकर्ताओं से कोई मदद या पोषण संबंधी सलाह नहीं मिली, जबकि कागजों में बच्चों का नाम पोषण ट्रैकर में दर्ज था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस के निर्देश पर जांच शुरू कर दी गई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज शुक्ला और जिला कार्यक्रम अधिकारी राजीव सिंह की रिपोर्ट के आधार पर महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक करुणा पाण्डेय और एएनएम विद्या चक्रवर्ती के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है। साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पूजा पाण्डेय को सेवा समाप्ति का नोटिस जारी किया गया है।

प्रशासन ने बच्चों का गलत इलाज करने वाले झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और निगरानी तंत्र की लापरवाही को उजागर कर दिया है।

हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्‍द्र द्विवेदी