समान नागरिक संहिता से सामाजिक समरसता और समान अधिकारों को मिलेगा बढ़ावा : डॉ. गोपाल शर्मा

 


मंदसौर, 06 जून (हि.स.)। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के अध्ययन एवं परीक्षण के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति की बैठक शनिवार को मंदसौर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे ऑडिटोरियम में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता समिति के सदस्य डॉ. गोपाल शर्मा ने की। इस दौरान जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, शांति समिति के सदस्यों, पत्रकारों और प्रबुद्ध नागरिकों ने सहभागिता कर अपने सुझाव और विचार रखे।

बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष दुर्गा विजय पाटीदार, पूर्व मंत्री कैलाश चावला, जिला योजना समिति सदस्य राजेश दीक्षित, अपर कलेक्टर एकता जायसवाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

डॉ. गोपाल शर्मा ने कहा कि समान नागरिक संहिता लागू होने से समाज में समानता, सामाजिक समरसता और सौहार्द को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विभिन्न धर्मों और समुदायों के लिए अलग-अलग पारिवारिक कानून लागू हैं, जबकि यूसीसी का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

उन्होंने बताया कि विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन संबंध जैसे विषय समान नागरिक संहिता के दायरे में आते हैं। यूसीसी लागू होने से महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को अधिक मजबूती मिलेगी तथा पारिवारिक मामलों में समान व्यवहार सुनिश्चित होगा।

डॉ. शर्मा ने कहा कि इस व्यवस्था के तहत पुत्र और पुत्री के अधिकारों में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं रहेगा। साथ ही दत्तक संतान को भी जैविक संतान के समान कानूनी अधिकार प्राप्त होंगे। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय और समान अवसर की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

बैठक के दौरान उपस्थित नागरिकों ने महिला अधिकारों, सामाजिक समरसता, संवैधानिक प्रावधानों और अन्य राज्यों में लागू व्यवस्थाओं से जुड़े विभिन्न सुझाव समिति के समक्ष प्रस्तुत किए। समिति ने सभी सुझावों को संकलित कर आगे के अध्ययन में शामिल करने का आश्वासन दिया।

डॉ. शर्मा ने बताया कि प्रदेश सरकार नागरिकों से सुझाव प्राप्त करने के लिए एक विशेष पोर्टल भी संचालित कर रही है। उन्होंने आमजन से इस विषय पर अपने विचार और सुझाव दर्ज कर जन-विमर्श में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।

हिन्दुस्थान समाचार / अशोक झलोया