सागर : उल्दन बांध परियोजना को लेकर हाईवोल्टेज ड्रामा, मुआवजे को लेकर मोबाइल टावर पर चढ़े किसान
सागर, 25 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा क्षेत्र में साेमवार काे एक बेहद संवेदनशील और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ बंडा बृहद परियोजना के अंतर्गत बन रहे उल्दन बांध से प्रभावित तीन किसान उचित मुआवजे की मांग को लेकर एक मोबाइल टावर पर चढ़ गए। दोपहर की भीषण और चिलचिलाती धूप में किसानों के टावर पर चढ़ने की खबर जैसे ही फैली, पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में तहसीलदार सहित पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभालने का प्रयास शुरू किया।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, प्रशासन आगामी मानसून और बारिश के सीजन में उल्दन बांध में पानी का भराव करने की पूरी तैयारी कर रहा है। इसके लिए बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों को खाली कराने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। इसी क्रम में ग्राम किरौला के ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन उन्हें बिना उचित मुआवजा दिए ही गांव खाली करने का लगातार दबाव बना रहा है। कई किसान ऐसे हैं जिन्हें अब तक उनकी जमीनों और मकानों की मुआवजा राशि नहीं मिली है। अधिकारियों के चक्कर काट-काट कर परेशान हो चुके तीन किसान सोमवार दोपहर करीब 1 बजे अपनी मांगें मनवाने के लिए गांव के ही एक ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़ गए।
किसानों का आरोप है कि प्रशासन हमें बेघर करने पर तुला है, लेकिन हमारी जमापूंजी और जमीनों का हक हमें नहीं दिया जा रहा। कई बार गुहार लगाने के बाद भी जब अधिकारियों ने नहीं सुनी, तब हमें यह आत्मघाती कदम उठाना पड़ा।
सोमवार दोपहर को जब पारा आसमान छू रहा था, ऐसे में तपते लोहे के टावर पर किसानों का चढ़ना उनकी जान के लिए बेहद जोखिम भरा था। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। माहौल बिगड़ता देख तहसीलदार और पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के माध्यम से टावर पर चढ़े किसानों से संवाद स्थापित किया और उन्हें नीचे उतरने की समझाइश दी। प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि उनके मुआवजे के प्रकरणों की त्वरित समीक्षा की जाएगी और न्याय मिलेगा, हालांकि, काफी देर तक समझाइश के बाद भी किसान अपनी मांग पर अड़े रहे और नीचे उतरने को तैयार नहीं हुए।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद किरौला गांव और आसपास के बंडा क्षेत्र में भारी तनाव का माहौल देखा जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों और किसान संगठनों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि समय रहते डूब प्रभावित सभी किसानों की समस्याओं का वैधानिक समाधान नहीं किया गया और उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिला, तो यह आंदोलन और उग्र रूप धारण कर सकता है।
मामले को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि वे लगातार किसानों के संपर्क में हैं और उन्हें सुरक्षित नीचे लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुआवजा वितरण की विसंगतियों को दूर करने के लिए फाइलों की दोबारा समीक्षा की बात भी कही जा रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे