उज्जैन में शिप्रा आरती के अधिकार को लेकर प्रशासन-पंडा समिति आमने-सामने, पुलिस कार्रवाई के विरोध में जल सत्याग्रह

 


उज्जैन, 08 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में शिप्रा आरती कराने के अधिकार को लेकर प्रशासन और पंडा समिति के बीच चल रहा विवाद अब आंदोलन में बदल गया है। रामघाट पर बीती 7 अगस्त को हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में पंडा समिति ने शनिवार शाम 4 बजे से शिप्रा नदी में जल सत्याग्रह शुरू कर दिया। समिति का कहना है कि तीर्थ पुरोहित पिछले 11 वर्षों से रामघाट पर शिप्रा आरती करा रहे हैं। ऐसे में अचानक आरती की जिम्मेदारी महाकाल मंदिर समिति को सौंपना पुरोहितों को आयोजन से बाहर करने जैसा है।

वहीं प्रशासन का कहना है कि सिंहस्थ के दौरान उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं को हरिद्वार की तर्ज पर भव्य शिप्रा आरती दिखाने के उद्देश्य से नई व्यवस्था शुरू की जा रही है। प्रशासन ने दोनों पक्षों को साथ आरती कराने का प्रस्ताव भी दिया था, लेकिन पंडा समिति इसके लिए तैयार नहीं हुई। पंडा समिति के अनुसार, 5 अगस्त को महाकाल मंदिर समिति ने महाकाल थाना और प्रशासन को पत्र भेजकर शिप्रा आरती के लिए सुरक्षा और जरूरी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने की मांग की थी। इसके बाद महाकाल मंदिर समिति के लोग शाम करीब 5 बजे मंदिर के बटुकों के साथ रामघाट पहुंचे। पंडा समिति के लोगों ने बटुकों को आरती करने से रोक दिया। दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक गतिरोध बना रहा। इसके बाद मंदिर समिति के बटुकों ने रामघाट पर दूसरी जगह आरती की।

7 अगस्त को भी इसी तरह की स्थिति बनी। पंडा समिति ने महाकाल मंदिर समिति के बटुकों को आरती करने से रोक दिया। मौके पर पुलिस बल के साथ दो एसडीएम पहुंचे और दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया। गतिरोध खत्म नहीं होने पर पुलिस ने पंडा समिति के पुजारियों को हल्के बल प्रयोग से वहां से हटाया। इसके बाद महाकाल मंदिर समिति के बटुकों ने रामघाट पर दूसरी जगह आरती की। पुलिस की इसी कार्रवाई के विरोध में पंडा समिति ने जल सत्याग्रह शुरू किया है।

एसडीएम बोले- सिंहस्थ में श्रद्धालुओं को दिखाएंगे भव्य आरती

एसडीएम पवन बारिया ने कहा कि सिंहस्थ में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन आएंगे। प्रशासन का उद्देश्य उन्हें हरिद्वार की तर्ज पर भव्य शिप्रा आरती का अनुभव कराना है। इसी उद्देश्य से महाकाल मंदिर प्रबंध समिति की ओर से शिप्रा नदी किनारे आरती शुरू करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि किसी को रोकने या हटाने का उद्देश्य नहीं है।

पंडा समिति बोली- 11 साल से हम करा रहे आरती

पंडा समिति के राजेश त्रिवेदी ने कहा कि तीर्थ पुरोहित वर्ष 2015 से लगातार शिप्रा आरती करा रहे हैं। समय के साथ आरती के स्वरूप में बदलाव कर इसे भव्य बनाया गया। उन्होंने कहा कि 11 साल बाद अचानक आरती की जिम्मेदारी महाकाल मंदिर समिति को देना पुरोहितों को आयोजन से बाहर करने जैसा है। पंडा समिति आरती की जिम्मेदारी खुद संभालना चाहती है और मंदिर समिति के बटुकों द्वारा अलग से आरती कराने का विरोध करेगी। त्रिवेदी ने प्रशासन से अपील की कि प्रशासन अपना काम करे और पुरोहितों को अपनी परंपरा के अनुसार आरती करने दी जाए।

प्रशासन ने साथ आरती का दिया था प्रस्ताव

एसडीएम एलएन गर्ग ने बताया कि प्रशासन की ओर से पंडा समिति के पुरोहितों को महाकाल मंदिर समिति के बटुकों के साथ मिलकर आरती करने का प्रस्ताव दिया गया था। दोनों पक्षों को साथ लेकर आयोजन करने की बात कही गई थी, लेकिन पुरोहित इसके लिए तैयार नहीं हुए। गर्ग के मुताबिक, अब रोजाना शिप्रा आरती महाकाल मंदिर समिति की ओर से कराई जाएगी। शनिवार शाम को भी रामघाट पर आरती आयोजित की जाएगी।

स्मार्ट सिटी ने भी निकाला टेंडर

शिप्रा आरती को बड़े सांस्कृतिक आयोजन के रूप में विकसित करने की तैयारी भी चल रही है। उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने हाल ही में 'उज्जैन में मां शिप्रा आरती का आयोजन' नाम से टेंडर जारी किया है। इसके तहत निजी एजेंसी के माध्यम से आरती के आयोजन, प्रबंधन, ब्रांडिंग और डिजिटल प्रचार-प्रसार की योजना है। स्मार्ट सिटी के सीईओ संदीप शिवा के अनुसार, चयनित निजी एजेंसी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत यूनिटी मॉल के पीछे स्थित शिप्रा घाट पर दैनिक और विशेष आरती कराएगी।

हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे