उज्जैन महापौर चुनाव के मामले में महापौर और निर्वाचन अधिकारी की आपत्तियां खारिज

 


उज्जैन , 27 फ़रवरी (हि.स.)। नगर पालिक निगम के महापौर चुनाव-2022 के मामले में प्रधान जिला न्यायाधीश पीसी गुप्ता की अदालत ने चुनाव याचिका को सुनवाई योग्य मानते हुए महापौर,निर्दलीय प्रत्याशी बाबूलाल चौहान और जिला निर्वाचन एवं रिटर्निंग अधिकारी की ओर से लगाए गए आवेदनों को खारिज कर दिया है। अब इस चुनाव याचिका पर अदालत में आगे की सुनवाई होगी।

यह जानकारी शुक्रवार को विज्ञप्ति जारी करके मामले में पैरवी कर रहे हाईकोर्ट एडवोकेट रसिक सुगंधी ने दी। उन्होने बताया कि 17 जुलाई,2022 को उज्जैन नगर पालिक निगम के महापौर चुनाव में इंडियन नेशनल कांग्रेस के उम्मीदवार याचिकाकर्ता ने चुनाव प्रक्रिया को चुनौती देते हुए याचिका में आरोप लगाया है कि मतगणना के बाद निर्वाचन अधिकारी ने शाम को याचिकाकर्ता को 1,33,317 और प्रत्यर्थी क्रं.1 भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी को 1,34,240 मत प्राप्त होने की घोषणा की थी, जिससे याचिकाकर्ता 923 मतों से पराजित हुआ। असत्य मतों की घोषणा का आरोप लगाते हुए याचिकाकर्ता ने तुरंत लिखित में पुन: मतगणना की मांग की थी।

याचिका के अनुसार रिटर्निंग ऑफिसर ने पहले आश्वस्त किया था कि आंकड़े गलत पाए जाने पर रिकाउंटिंग होगी, लेकिन बाद में सत्ता दल के दबाव में आकर मांग खारिज कर दी गई और प्रारूप 21.क में जानबूझकर असत्य इन्द्राज किए गए। याचिका में एक गंभीर आरोप यह भी है कि मतदान केंद्र क्रं. 274 पर याचिकाकर्ता को 277 मत मिले थे, लेकिन उसे 217 मत दर्शाकर 60 वैध मतों को अनुचित रूप से अस्वीकृत कर दिया गया।

इस चुनाव याचिका के खिलाफ प्रत्यर्थी क्रं.1,4 और 5 ने आदेश 7 नियम 11 सीपीसी के तहत आवेदन प्रस्तुत कर अदालत से इसे निरस्त करने की मांग की थी। उनका तर्क था कि याचिका विधिक प्रावधानों के विपरीत हैए इसमें वाद कारण का अभाव हैए तथ्यों को छिपाया गया है और इसका सत्यापन सही नहीं है। इसलिए इसे प्रारंभिक तौर पर ही खारिज किया जाए।

न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद 19 फरवरी 2026 को पारित अपने आदेश में स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में सभी आवश्यक बिंदुओं का विस्तृत रूप से उल्लेख किया है और इसके समर्थन में शपथ पत्र भी प्रस्तुत किया है। प्रत्यर्थियों द्वारा उठाई गई आपत्तियां प्रथम दृष्टया स्वीकार योग्य नहीं हैं और बिना साक्ष्य लिए इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता कि याचिका असत्य रूप से प्रस्तुत की गई है। इस आधार पर न्यायालय ने प्रत्यर्थी 1,4 और 5 द्वारा प्रस्तुत किए गए आवेदनों को निरस्त कर दिया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्‍वेल