उज्जैन: रजत चंद्र-त्रिशूल और मुकुट से सजे बाबा महाकाल, भस्म अर्पित कर किया दिव्य श्रृंगार

 




उज्जैन, 23 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैनस्थितविश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार तड़के भगवान महाकाल की भस्म आरती विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। मंदिर के कपाट खुलने के बाद सभा मंडप में वीरभद्रजी के कान में स्वस्ति वाचन किया गया। घंटी बजाकर भगवान से आज्ञा लेने के बाद चांदी के पट खोले गए। इसके बाद गर्भगृह के द्वार खोले गए और भगवान महाकाल का श्रृंगार उतारकर पूजन-अभिषेक की प्रक्रिया शुरू की गई।

सबसे पहले भगवान का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक कर पूजन किया गया। कर्पूर आरती के बाद भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म रमाई गई। भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल का आकर्षक श्रृंगार किया गया। बाबा को रजत चंद्र-त्रिशूल, शेषनाग का रजत मुकुट, चांदी की मुंडमाल और रुद्राक्ष की माला धारण कराई गई। भांग, चंदन और सुगंधित पुष्पमालाओं से भगवान का अलंकरण किया गया। इसके बाद फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया।

भस्म आरती में गूंजे जयकारे

भस्म आरती के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचे। मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान में अपनी मनोकामनाएं कही। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल भक्तों को साकार स्वरूप में दर्शन देते हैं। श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे