सागरः समान नागरिक संहिता पर जिले के प्रबुद्धजनों ने रखे अपने विचार
सागर, 04 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता को रातल पर उतारने की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में गुरुवार को सागर जिले में समाज के विभिन्न वर्गों, विधि विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों और प्रबुद्ध नागरिकों के साथ सीधे संवाद का एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम संपन्न हुआ।
कानूनविद और उच्च स्तरीय समिति के सदस्य अनूप नायर की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक का मुख्य उद्देश्य समान नागरिक संहिता लागू करने से पहले समाज के हर वर्ग की आकांक्षाओं, विचारों और सुझावों को संकलित करना है, ताकि समिति अपनी व्यापक रिपोर्ट शासन को सौंप सके।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए अनूप नायर ने बताया कि सागर के बुद्धिजीवियों, कानूनविदों और समाज के प्रबुद्धजनों से आमंत्रित किए गए ये सुझाव बेहद बहुमूल्य हैं। इन सभी सुझावों को समिति के माध्यम से शासन स्तर तक प्रेषित किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समिति विवाह, भरण-पोषण, विवाह विच्छेद (तलाक), उत्तराधिकार तथा अन्य पारिवारिक कानूनों से जुड़े तमाम विधिक, सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं का बेहद गहराई से और विस्तृत अध्ययन कर रही है। इन सभी बिंदुओं की गहन समीक्षा करने के बाद ही समिति समान नागरिक संहिता के संबंध में अपनी उपयुक्त और व्यावहारिक अनुशंसाएं सरकार को सौंपेगी। नायर ने जनभागीदारी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य कानून निर्माण में समाज के हर वर्ग की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करना है।
बैठक में मौजूद सागर विधानसभा क्षेत्र के विधायक शैलेंद्र जैन ने यूसीसी का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने देश की वर्तमान कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा, जिस तरह पूरे देश में एक समान कानून और संविधान पूरी तरह से लागू है, वैसे ही वर्तमान परिस्थितियों में, समान नागरिक संहिता आज के समय की एक बेहद महत्वपूर्ण आवश्यकता और जरूरत बन गई है। इसके साथ ही उन्होंने संवाद और संवेदनशीलता पर जोर देते हुए सुझाव दिया कि सरकार को सभी पक्षों से विचार-विमर्श करके ही इसे लागू करना चाहिए ताकि किसी भी वर्ग की भावनाएं आहत न हों।
नरयावली विधायक प्रदीप लारिया ने बैठक में हो रहे 'विचार विनिमय' को एक स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान बताते हुए इसकी सराहना की। उन्होंने जोर देकर कहा कि यूसीसी समय की मांग है। उन्होंने नागरिकों को आश्वस्त करते हुए कहा, भारतीय संविधान में हम सभी के अधिकार पूरी तरह सुरक्षित हैं, और इस नए कानून से किसी भी समुदाय के मौलिक अधिकारों को कोई खतरा नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि देश के संसाधनों पर सभी का समान अधिकार है और एक समान कानून सभी नागरिकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करेगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 'भारतीय दंड संहिता' भी एक समान कानून का ही रूप है, जिसे देश का हर नागरिक मानता है।
जनपरामर्श बैठक में सागर जिले के कई प्रबुद्ध नागरिकों ने यूसीसी के अलग-अलग पहलुओं पर अपनी राय रखी। सुखदेव मिश्रा ने सामाजिक समरसता की बात करते हुए कहा कि ऐसी कोई भी प्रथा जो समाज को विभाजित करती हो, वह समाज और देश के हित में नहीं हो सकती। अनिल तिवारी ने सुझाव दिया कि यूसीसी की यह बैठकें केवल जिला स्तर तक सीमित न रहकर गांवों में भी आयोजित की जानी चाहिए ताकि इसका व्यापक प्रचार-प्रसार हो सके और आमजन जागरूक हो सकें। डॉ. ज्योति चौहान ने यूसीसी लागू होने से मातृ और शिशु स्वास्थ्य पर पड़ने वाले सकारात्मक एवं दूरगामी प्रभावों के बारे में सभी को अवगत कराया। शैलेश केसरवानी ने हर व्यक्ति के बराबर अधिकार की वकालत करते हुए यूसीसी का समर्थन किया और कहा कि इस तरह के संवाद स्कूल और कॉलेजों में भी आयोजित होने चाहिए ताकि युवा पीढ़ी को इसकी सही जानकारी मिले। सुश्री स्तुति जैन ने यूसीसी लागू होने की स्थिति में उत्तराधिकार विषय संबंधी निर्णयों पर अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किए।
बैठक में शामिल कई प्रबुद्धजनों और महिलाओं ने यूसीसी को 'मातृशक्ति के लिए समानता और उनके सम्मान' के लिए बेहद जरूरी बताया। वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं को समान अधिकार और सम्मान देने के साथ-साथ यह सामाजिक न्याय के लिए भी एक प्रगतिशील कदम साबित होगा। जहाँ कई लोगों ने इसे लैंगिक समानता सुनिश्चित करने वाला बताया, वहीं कुछ अन्य नागरिकों ने अल्पसंख्यकों के धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए सावधानी बरतने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। कुल मिलाकर पूरी बैठक बेहद सौहार्दपूर्ण और सकारात्मक वातावरण में संपन्न हुई।
इस महत्वपूर्ण विमर्श के अवसर पर प्रभारी कलेक्टर अविनाश रावत, जिला पंचायत सीईओ विवेक केवी, नगर निगम अध्यक्ष वृन्दावन अहिरवार, भाजपा जिला अध्यक्ष श्याम तिवारी, सुश्री रानी कुशवाहा सहित अन्य जनप्रतिनिधि, शांति समिति के सदस्य, प्रबुद्धजन एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. अमर जैन द्वारा किया गया।
समिति के सदस्य अनूप नायर ने बैठक के अंत में एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जो नागरिक किन्हीं कारणों से इन बैठकों में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो पाए हैं, वे भी इस प्रक्रिया का हिस्सा बन सकते हैं। मध्य प्रदेश शासन समाज के हर वर्ग की सहभागिता चाहता है, इसलिए आम नागरिक सीधे शासन की आधिकारिक वेबसाइट ucc.mp.gov.in पर जाकर आगामी 15 जून तक ऑनलाइन माध्यम से समान नागरिक संहिता (UCC) के संबंध में अपने बहुमूल्य विचार, सुझाव या आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे