जबलपुर: समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों को बराबरी का अधिकार उपलब्ध कराना-शत्रुघ्न सिंह
जबलपुर, 18 जून (हि.स.)। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के अध्ययन एवं परीक्षण के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति की जनपरामर्श बैठक गुरुवार को भंवरताल गार्डन स्थित संस्कृति थिएटर में आयोजित की गई। बैठक में समिति के प्रमुख सदस्य शत्रुघ्न सिंह ने कहा कि देश में वर्तमान में दो दर्जन से अधिक ऐसे कानून हैं, जिनमें एक ही प्रकार के मामलों में अलग-अलग प्रावधान लागू होते हैं। समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों को समान अधिकार उपलब्ध कराना है, न कि किसी धर्म या धार्मिक मान्यता में हस्तक्षेप करना।
सिंह ने कहा कि समिति समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के संबंध में जनता के विचार जानने के लिए विभिन्न स्थानों पर संवाद कर रही है। उन्होंने कहा कि यूसीसी का संबंध परिवार से जुड़े कानूनों, जैसे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, विरासत और पारिवारिक अधिकारों से है। वर्तमान में देश में अधिकांश कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होते हैं, लेकिन पारिवारिक मामलों में अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं। इसी कारण समान परिस्थितियों में अलग-अलग लोगों को अलग-अलग कानूनी अधिकार प्राप्त होते हैं।
सिंह ने कहा कि भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराएं अत्यंत प्राचीन हैं। समय के साथ विभिन्न धर्मों और संप्रदायों के अपने-अपने पारिवारिक कानून विकसित हुए। यहां तक कि एक ही धर्म के भीतर भी अलग-अलग परंपराओं और मान्यताओं के आधार पर कानूनों में भिन्नता देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक समाज पुरुष प्रधान रहा है, जिसके कारण अधिकांश पारंपरिक कानूनों में पुरुषों को महिलाओं की अपेक्षा अधिक अधिकार प्राप्त हुए। हालांकि समय के साथ सामाजिक परिस्थितियां बदली हैं और महिलाओं के अधिकारों तथा समानता के प्रश्न को अधिक महत्व मिला है।
अपने संबोधन में उन्होंने संविधान सभा की चर्चाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माण के दौरान समान नागरिक संहिता पर व्यापक बहस हुई थी। एक पक्ष का मानना था कि व्यक्तिगत कानून धार्मिक आस्था और परंपराओं से जुड़े हैं, इसलिए उनमें हस्तक्षेप धार्मिक स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकता है। वहीं दूसरे पक्ष का मत था कि सामाजिक सुधार, समानता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए कानूनों में समय-समय पर बदलाव आवश्यक हैं।
समिति के सदस्य सिंह ने कहा कि संविधान सभा में डॉ. भीमराव अंबेडकर, कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी और अन्य कई सदस्यों ने समान नागरिक संहिता के पक्ष में अपने विचार रखे थे। उनका मानना था कि सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलने चाहिए और कानूनों में एकरूपता राष्ट्रीय एकता तथा सामाजिक समरसता को मजबूत कर सकती है।
जन परामर्श बैठक में समान नागरिकता संहिता के संबंध में अध्ययन एवं परीक्षण के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति के सदस्य अनूप नायर, प्रो. गोपाल शर्मा, बुधपाल सिंह एवं डॉ. शोभा पैठणकर, सांसद आशीष दुबे, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, विधायक अजय विश्नोई, अभिलाष पांडेय, संतोष वरकड़े, जबलपुर विकास प्राधिकरण अध्यक्ष संदीप जैन एवं उपाध्यक्ष प्रशांत केसरवानी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष विवेक पटेल, भाजपा महानगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर, डॉ जितेंद्र जामदार, पार्षद कमलेश अग्रवाल, एमआईसी सदस्य, पार्षद, कलेक्टर राघवेंद्र सिंह, नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार, ज्वाइंट कमिश्नर कविता बाटला, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत तथा प्रबुद्धजन एवं बड़ी संख्या में नागरिक भी मौजूद थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक