जनजातीय संग्रहालय में 22 अक्टूबर से सजेगा कठपुतली कला का रंगमंच
भोपाल, 21 अक्टूबर (हि.स)। मध्य प्रदेश जनजातीय संग्रहालय के मुक्ताकाश मंच पर 22 से 25 अक्टूबर तक पुतुल समारोह का आयोजन किया जाएगा। जनजातीय संग्रहालय, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली और डॉल्स थिएटर, कोलकाता के सहयोग से आयोजित इस समारोह में कठपुतली कला की विभिन्न शैलियों के माध्यम से कहानियों, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक प्रसंगों का मंचन होगा। चार दिवसीय समारोह में प्रतिदिन दोपहर दो बजे से प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
समारोह की शुरुआत 22 अक्टूबर को मुंबई के श्री सत्यजीत रामदास पाधेय एवं उनके साथी कलाकारों की प्रस्तुति से होगी। इस दौरान बोलती गुड़िया और दास्ताना शैली में ‘कठपुतलियों का संसार’ कहानी का मंचन किया जाएगा।
23 अक्टूबर को मणिपुर के बसंत शर्मा एवं उनके साथी कलाकार धागा शैली में ‘नट संकीर्तन’ और ‘एक गोपी, एक श्याम–रासलीला’ प्रस्तुत करेंगे। वहीं, 24 अक्टूबर को सिंधुदुर्ग के बालकृष्ण गणपत मसगे एवं उनके साथी कलाकार धागा, छाया और दास्ताना शैलियों के माध्यम से ‘सीतायन प्रसंग’ और ‘कर्ण की कथा’ का मंचन करेंगे।
समारोह के अंतिम दिन 25 अक्टूबर को कोलकाता के सुदीप गुप्ता एवं उनके साथी कलाकार छड़ और धागा शैली में एकांकी ‘धनुर्धर’ प्रस्तुत करेंगे। अलग-अलग क्षेत्रों से आए कलाकारों की प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को कठपुतली कला की विविध परंपराओं से परिचित होने का अवसर मिलेगा।
समारोह के दौरान बच्चों के लिए विशेष शिविर भी आयोजित किया जाएगा। इसमें बच्चे कठपुतली कला की बारीकियों को समझने के साथ अपने हाथों से कठपुतलियां बनाना सीखेंगे। विभिन्न सामग्रियों की मदद से कठपुतलियों के पात्र तैयार करने, उनके हाव-भाव और गतिविधियों को समझने तथा उनके जरिए छोटी-छोटी कहानियां प्रस्तुत करने के लिए बच्चों को प्रोत्साहित किया जाएगा। इस आयोजन का उद्देश्य बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के साथ कठपुतली कला की पारंपरिक शैलियों से परिचित कराना है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा