अनूपपुर: रात में जैतहरी नगर में घुसे तीन जंगली हाथी, लोगों की मदद से वन विभाग ने खदेड़ा
अनूपपुर, 14 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में पिछले 111 दिनों से 4 जंगली हाथियों की दहशत बनी हुई है, जिले के कई क्षेत्रों में हाथियों का झुडं गांवों में पहुंच खेतों में लगी फसलों को खाकर नुकसान पहुंचा रहे है। सोमवार की रात तीन हाथियों ने जैतहरी नगर में घुसकर दहशत फैला दी। जिससे अफरा-तफरी मच गई। वहीं वन विभाग भी लगातार हाथियों की निगरानी की बात कर रहा हैं। मंगलवार की सुबह तीनों जंगली हाथी धनगवां बीट के जंगल में डेरा जमाये हुए हैं। वहीं एक लापता हाथी पोडी बीट के जंगल में हैं।
जानकारी के अनुसार जंगली हाथियों का दल पूरे जिले में भ्रमण कर ग्रामीणों और फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। लेकिन बड़ी दहशत की बात जब हो गई, सोमवार की दरमियानी रात तीन हाथियों के दल ने जैतहरी के रिहायशी इलाकों में घुसकर दहशत फैला दी। रात को नगरीय इलाके में घुसे हाथियों को देखकर लोगों में दहशत फैल गई। बस स्टैंड इलाके में हाथियों की धमाचौकड़ी के चलते अफरा-तफरी के हालात वन गए। पुलिस और वन विभाग की टीम ने स्थानीय लोगों की मदद से हाथियों को रिहायशी इलाके से किसी तरह खदेड़ा। अब हाथियों ने प्रशासन और वन विभाग की शहरी क्षेत्र में प्रवेश कर चिंता बढ़ा दी है।
रात अचानक नगरीय क्षेत्र में घुसे हाथी
जानकारी के अनुसार जिले जैतहरी नगर में सोमवार की 10 बजे अचानक उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब बीच बाजार, बस स्टैंड और होटल के सामने तीन जंगली हाथी आ पहुंचे। हाथियों के बाजार क्षेत्र में घुसने से लोगों में दहशत का माहौल बन गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ये तीनों हाथी लगातार बाजार क्षेत्र में घूमते नजर आए। स्थानीय लोग और वन विभाग की टीम आवाज देकर और शोर मचाकर हाथियों को भगाने की कोशिश की, लेकिन हाथी बार-बार बाजार की ओर बढ़ते रहे। स्थानीय लोगों और प्रशासन की टीम ने किसी तरह हाथियों को दल को दूसरी तरफ खदेड़कर नगरीय क्षेत्र से बाहर करने की कोशिश की।
गस्ती दल कर रही निगरानी
हाथियों के रिहायशी और आबादी वाले नगरीय क्षेत्र में आने से अब लोगों के साथ-साथ प्रशासन और वन विभाग की चिंता बढ़ गई है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन अलर्ट पर है और लोगों से अपील की गई है कि वे घरों में सुरक्षित रहें और हाथियों के पास जाने की कोशिश ना करें। अगर हाथियों से संबंधित कुछ भी मूवमेंट या आपात स्थिति बनती है तो तुरंत प्रशासन और वन विभाग के गस्ती दल को सूचित करें।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला