अनूपपुर में हाथियों की दस्तक जारी, तीन का दल भगतबांध में सक्रिय, एक मरवाही वन क्षेत्र पहुंचा
अनूपपुर, 4 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के अनूपपुर और जैतहरी वन परिक्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से विचरण कर रहे जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। चार हाथियों का दल अब दो हिस्सों में बंट गया है। तीन हाथियों का समूह जिले के भगतबांध और आसपास के गांवों में सक्रिय है, जबकि एक हाथी छत्तीसगढ़ के मरवाही वन परिक्षेत्र में पहुंच गया है। लगातार हो रहे नुकसान से ग्रामीणों में दहशत के साथ-साथ प्रशासन के प्रति नाराजगी भी बढ़ रही है।
वन विभाग के अनुसार तीन हाथियों का झुंड दिन के समय भोलगढ़ और खांड़ा के बीच स्थित जंगल में डेरा डाले हुए है, जबकि रात होते ही यह गांवों की ओर रुख कर रहा है। शुक्रवार रात हाथियों ने खांड़ा गांव के समीप खेत में बने एक मकान को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। बताया गया कि मोहन सिंह के घर को हाथियों ने आठवीं बार निशाना बनाया। इसके अलावा साहेब सिंह की रसोई और गौशाला की दीवार भी तोड़ दी गई।
इसके बाद हाथियों का दल ग्राम पंचायत हर्री के भगतबांध गांव पहुंचा, जहां भगवानदास राठौर, जगतनारायण राठौर, रमेश राठौर, नेमसाय राठौर सहित कई किसानों के खेतों और बाड़ियों में लगी सब्जियों तथा अन्य फसलों को नुकसान पहुंचाया। शनिवार को तीनों हाथी फिर जंगल में लौटकर विश्राम करते रहे और शाम ढलने का इंतजार करते दिखाई दिए।
उधर, अपने समूह से अलग हुआ एक अकेला हाथी जैतहरी क्षेत्र से आगे बढ़ते हुए छत्तीसगढ़ के मरवाही वन परिक्षेत्र के घुसरिया बीट तक पहुंच गया है। इससे पहले उसने पड़रिया पंचायत के चोई गांव, भलुवान टोला और पडमनिया टोला सहित कई बस्तियों में मकानों में तोड़फोड़ की तथा खेतों में खड़ी फसलों और अनाज को नुकसान पहुंचाया। इसके बाद वह धनगवां, कुसुमहाई, कुकुरगोड़ा, बचहा और चोलना क्षेत्र से होते हुए छत्तीसगढ़ सीमा में प्रवेश कर गया।
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के कारण लगातार मकानों, फसलों और घरेलू सामान का नुकसान हो रहा है, लेकिन अब तक प्रभावित परिवारों को राजस्व विभाग से आर्थिक सहायता नहीं मिल पाई है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है और कई स्थानों पर उन्होंने वन विभाग के कर्मचारियों के समक्ष भी अपनी शिकायत दर्ज कराई है।
वन विभाग की टीमें हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखे हुए हैं। गश्ती दल ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह देने के साथ हाथियों की लोकेशन पर निगरानी बनाए हुए हैं, ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके। हालांकि लगातार हो रही आवाजाही से प्रभावित गांवों के लोग रातभर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं और क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला