भूतड़ी अमावस्या पर उज्जैन में  52 कुंड पर स्नान करने पहुंचे हजारों लोग

 


उज्जैन , 18 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में चैत्र अमावस्या यानी भूतड़ी अमावस्या पर बुधवार को धर्मनगरी में आस्था का सैलाब देखा गया। प्रात:काल से ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु शिप्रा नदी के रामघाट और भैरवगढ़ स्थित केडी पैलेस के 52 कुंड पर पहुंच गए थे। उज्जैन जिले के साथ-साथ दूर-दराज के राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने पहले शिप्रा में स्नान कर आस्था की डुबकी लगाई, इसके बाद मंदिरों में पहुंचकर देव दर्शन किए।

भूतड़ी अमावस्या पर बुधवार को बड़ी संख्या में ऐसे लोग 52 कुंड भी पहुंचे, जो प्रेत बाधा या ऊपरी संकट से पीडि़त बताए जा रहे थे। उनके परिजन उन्हें यहां लेकर पहुंचे थे। यहां पर विशेष रूप से स्नान कराकर मुक्ति की कामना की गई। यहां का माहौल दिनभर धार्मिक अनुष्ठानों और मान्यताओं के बीच मेले जैसा बना रहा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भूतड़ी अमावस्या के दिन शिप्रा नदी में स्नान करने से पितरों को तृप्ति मिलती है और व्यक्ति को कष्टों से मुक्ति मिलती है। कई श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद तर्पण कर अपने पितरों की शांति के लिए विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मान्यता यह भी है कि इस दिन नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव समाप्त करने के लिए विशेष रूप से यह स्नान फलदायी होता है। यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए दोपहिया, कार और बसों के लिए अलग-अलग स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था की गई थी। पूरे दिन प्रशासनिक अमला मुस्तैदी से तैनात रहा, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

कई राज्यों से आए श्रद्धालुकेडी पैलेस स्थित 52 कुंड पर मध्य प्रदेश के साथ-साथ राजस्थान, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचे। यहां स्थित सूर्य कुंड और ब्रह्म कुंड में स्नान करने से बुरी आत्माओं के साए से मुक्ति मिलने की मान्यता है। यहीं कारण है कि यहां पर कई स्थानों पर लोग बुरी शक्तियों को दूर करने के लिए पारंपरिक तरीके अपनाते नजर आए।

एसडीईआरएफ की टीम ने रखी नजररामघाट और केडी पैलेस पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। घाटों पर होमगार्ड, एसडीईआरएफ और मां शिप्रा तैराक दल के सदस्य तैनात रहे, जो लगातार लोगों को गहरे पानी में न जाने की समझाइश देते रहे। इसके अलावा घाटों पर चेंजिंग रूम की व्यवस्था भी की गई थी, जिससे श्रद्धालुओं को सुविधा मिल सके।

पितरों का किया तर्पणगौरतलब है कि धार्मिक ग्रंथों में भूतड़ी अमावस्या का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि स्कंद पुराण में इसका उल्लेख मिलता है, जिसमें इस दिन किए गए स्नान और तर्पण को विशेष फलदायी बताया गया है। यहीं कारण है कि सिद्धवट मंदिर पर भी कई लोगों ने अपने पितरों का तर्पण किया।

महिला को पुलिस ने पहुंचाया अस्पतालरामघाट पर सुबह हजारों की संख्या में श्रद्धालु शिप्रा नदी में स्नान के लिए पहुंचे थे। इस दौरान एक दिव्यांग महिला की अचानक तबीयत खराब हो गई। सूचना मिलते ही महाकाल थाने में पदस्थ एएसआई चंद्रभान सिंह चौहान ने अन्य पुलिसकर्मियों की सहायता से महिला को डायल 112 की सहायता से उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया।

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हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्‍वेल