अनूपपुर: सर्वोदय तीर्थ में पर्यूषण पर्व 28 सितंबर को क्षमावाणी महोत्सव के साथ होगा समापन
अनूपपुर, 21 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक तीर्थ स्थली अमरकंटक के दिगंबर जैन सर्वोदय तीर्थ क्षेत्र में श्री पर्वराज दशलक्षण पर्यूषण पर्व श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाया जा रहा है। पर्व का शुभारंभ 16 सितंबर से शुरू होकर 28 सितंबर को क्षमावाणी महोत्सव के साथ सम्पन्न होगा।
इस पर्व के दौरान प्रतिदिन भगवान आदिनाथ की विशेष पूजा-अर्चना, शांतिधारा एवं विभिन्न धार्मिक विधान संपन्न किए जा रहे हैं। जैन समाज के पुरुष, महिलाएं एवं श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता कर रहे हैं। इस दौरान दौरान उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, सत्य, शौच, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य जैसे दस धर्म लक्षणों की आराधना की जा रही है। दशलक्षण पर्व आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि एवं संयम की साधना का अवसर है, जो श्रद्धालुओं को अहिंसा, क्षमा, त्याग और सदाचार को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है।
दिगंबर जैन समाज के देवेंद्र जैन चुन्नू एवं निधि जैन ने बताया कि श्री पर्वराज पर्यूषण पर्व 2026 के उपलक्ष्य में 28 सितंबर सोमवार को दिगंबर जैन सर्वोदय तीर्थ क्षेत्र में भव्य क्षमावाणी महोत्सव एवं समापन समारोह आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में धार्मिक अनुष्ठानों, वात्सल्य भोज, शोभायात्रा एवं महाआरती सहित विविध आयोजन होंगे। जहां प्रातः 8 बजे अभिषेक, शांतिधारा एवं विधान संपन्न होगा। 10 बजे क्षमावाणी महोत्सव, 11 बजे वात्सल्य भोज होगा। दोपहर 12 बजे सर्वोदय तीर्थ क्षेत्र परिसर से विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसके पश्चात दोपहर 3 बजे अभिषेक एवं शांतिधारा तथा शाम 7 बजे भव्य संगीतमय महाआरती का आयोजन के साथ समारोह होगा।
क्षमा और मैत्री का संदेश देगा महोत्सव
जैन धर्म में क्षमावाणी पर्व का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। यह पर्व परस्पर क्षमा, मैत्री, सद्भाव एवं आत्मशुद्धि की भावना को सुदृढ़ करता है। क्षमावाणी के अवसर पर श्रद्धालु जाने-अनजाने में हुई भूलों के लिए एक-दूसरे से क्षमा याचना करते हैं तथा मन में किसी के प्रति वैरभाव न रखने का संकल्प लेते हैं।
सर्वोदय तीर्थ क्षेत्र कमेटी एवं सकल दिगंबर जैन समाज अमरकंटक के निवेदन पर आयोजित इस महोत्सव में समाज के श्रद्धालुओं से सहभागिता की अपेक्षा की गई है। क्षमावाणी महोत्सव के साथ पर्यूषण पर्व के धार्मिक आयोजनों का समापन होगा और समाज को क्षमा, प्रेम, सौहार्द एवं परस्पर सम्मान का संदेश मिलेगा।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला