उज्जैनः संघ द्वारा प्रमुख जन संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन
उज्जैन, 19 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में रविवार को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ द्वारा मंगलनाथ मार्ग स्थित शा.धनवंतरि आयुर्वेद चिकित्सा महाविद्यालय परिसर में ‘प्रमुख जन संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस आयोजन में उज्जैन संभाग के सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर,समाचार पत्रों के संपादक, ब्लॉगर और स्तंभकार शामिल हुए।
इस जन संवाद कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र कुमार ने संबोधित किया। अध्यक्षता विभाग संघचालक बलराज भट्ट ने की। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में विचार निर्माण और सकारात्मक विमर्श को दिशा देना रहा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता नरेंद्र कुमार ने संघ के उद्देश्य, राष्ट्र निर्माण की अवधारणा और पंच परिवर्तन जैसे विषयों पर विस्तार पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में समाज केवल घटनाओं से नहीं, बल्कि उनके विश्लेषण और प्रस्तुतिकरण से अधिक प्रभावित होता है, जिसमें लेखकों और विचारकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। संघ का उद्देश्य भारत को परम वैभव की स्थिति तक पहुंचाना है। इसका अर्थ केवल आर्थिक समृद्धि नहीं, बल्कि ऐसा राष्ट्र बनाना है जो हर क्षेत्र में अग्रणी हो और विश्व में शांति का संदेश दे। भारत की शक्ति कभी आक्रामक नहीं रही, बल्कि भारत ने सदैव विश्व को सांस्कृतिक मूल्य और सह-अस्तित्व का संदेश दिया। भारत के मजबूत बनने से विश्व में स्थिरता और शांति सुनिश्चित होती है। संघ के स्वयंसेवक प्रतिदिन इसी संकल्प के साथ कार्य करते हैं कि बिना किसी पर अपनी विचारधारा थोपे भारत माता की जय विश्वभर में गूंजे।
स्वाधीनता से आत्मनिर्भरता तक स्व का बोध आवश्यकउन्होंनेे कहा कि भारत की प्रगति का आधार स्वदेशी, स्वभाषा और स्वावलंबन है। यदि देश को आत्मनिर्भर बनाना है तो हमें अपने मूल्यों, परंपराओं और भाषा पर गर्व करना होगा। उन्होंने उदाहरण दिया कि अपनी मातृभाषा में हस्ताक्षर करना भी आत्मसम्मान का प्रतीक है। वैश्विक संकटों के बीच आत्मनिर्भरता ही देश को सुरक्षित रख सकती है। स्वदेशी उत्पादों को अपनाने से न केवल आर्थिक मजबूती आएगी, बल्कि राष्ट्र की स्वतंत्र पहचान भी सुदृढ़ होगी। युवाओं से आग्रह किया कि वे स्व की भावना को अपने जीवन में व्यवहारिक रूप से अपनाएं।
परिवार और संस्कार समाज की असली ताकतनरेंद्र कुमार ने भारतीय परिवार व्यवस्था को समाज की सबसे बड़ी शक्ति बताया। कहा कि भारत की पहचान उसके संस्कारों और पारिवारिक मूल्यों से है, जिसे दुनिया भी स्वीकार करती है। आधुनिकता के दौर में इन मूल्यों में कुछ कमी आई है, जिसे सुधारने की आवश्यकता है। नई तकनीकों का विवेकपूर्ण उपयोग जरूरी है। यदि परिवार सशक्त रहेगा तो समाज और राष्ट्र भी मजबूत होंगे। संस्कारों से ही आने वाली पीढ़ी सही दिशा में आगे बढ़ेगी।
पंच परिवर्तन: समाज परिवर्तन के पांच सूत्रउन्होंने कहाकि संघ ने समाज में परिवर्तन के लिए पंच परिवर्तन का आह्वान किया है। इसमें सामाजिक समरसता, स्व का बोध, सशक्त परिवार, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्य शामिल हैं। जाति, भाषा या अन्य आधारों पर भेदभाव समाप्त करना जरूरी है। पर्यावरण के संदर्भ में पेड़, पानी और प्लास्टिक पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। नागरिकों को नियमों का पालन करना और अनुशासन में रहना भी उतना ही आवश्यक है। ये पांच सूत्र व्यक्ति से लेकर राष्ट्र तक परिवर्तन लाने में सक्षम हैं, लेकिन इसके लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है।
उद्बोधन पश्चात प्रश्नोत्तर सत्र चला। इस सत्र में उपस्थित प्रबुद्धजन ने अपनी जिज्ञासाएं रखी,जिसका समाधान मंच से किया गया। प्रमुख जनसंवाद का संचालन विभाग प्रचार प्रमुख सोहनलाल उदेनिया ने किया। वंदेमातरम् गीत के सामुहिक गायन पश्चात कार्यक्रम का समापन हुआ।
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हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्वेल