अनूपपुर: 43 वर्षों की आस्था, समर्पण और संस्कारों की अमर गाथा है जागृति दुर्गा पूजा महोत्सव
अनूपपुर, 18 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में कुछ परंपराएं केवल धार्मिक आयोजन नहीं होतीं, बल्कि वे किसी नगर की पहचान, उसकी सांस्कृतिक विरासत और पीढ़ियों की भावनाओं का जीवंत इतिहास बन जाती हैं। जिला मुख्यालय अनूपपुर का जागृति दुर्गा पूजा महोत्सव भी ऐसी ही एक गौरवशाली परंपरा है, जो इस वर्ष अपने 43वें वर्ष में प्रवेश कर श्रद्धा, भक्ति, सामाजिक समरसता और सामूहिक समर्पण की अनूठी मिसाल प्रस्तुत कर रहा है। चार दशकों से अधिक की इस यात्रा में मां भगवती के प्रति अटूट आस्था के साथ अनेक विभूतियों का त्याग, परिश्रम और निष्ठा जुड़ी हुई है।
‘गुरुजी’ ने दी ‘जागृति’ को पहचान, आस्था को मिला नया स्वरूप
बहुभाषी न्यूज एजेंसी हिन्दुस्थान समाचार से रविवार को कन्हैयालाल मिश्र ने चर्चा के दौरान बताया कि जागृति दुर्गा पूजा महोत्सव की स्थापना और उसे विशिष्ट पहचान दिलाने का श्रेय स्वर्गीय प्रभाकर मिश्र ‘गुरुजी’ को जाता है। उनके संकल्प ने एक ऐसे धार्मिक आयोजन की नींव रखी, जो समय के साथ अनूपपुर नगर की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया। उनके द्वारा रोपित आस्था का यह पौधा आज विशाल वृक्ष का रूप ले चुका है, जिसकी छांव में नई पीढ़ी भी अपनी परंपराओं, संस्कारों और सामाजिक एकता के मूल्यों को आत्मसात कर रही है।
पूर्वजों का मार्गदर्शन बना महोत्सव की मजबूत आधारशिला
कन्हैयालाल मिश्र ने बताया कि इस महोत्सव की गौरवपूर्ण यात्रा में अनेक दिवंगत विभूतियों का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। स्वर्गीय गिरिजा प्रसाद मिश्र का प्रारंभिक दौर से प्राप्त सानिध्य और मार्गदर्शन आयोजन की महत्वपूर्ण शक्ति रहा। वहीं, स्वर्गीय लक्षपत प्रसाद त्रिपाठी ‘मददगार ’ ने संरक्षक के रूप में समिति को संबल प्रदान किया। स्वर्गीय पुरुषोत्तम दास मिश्र की कर्मठता और समर्पण ने महोत्सव को मजबूती दी, जबकि स्वर्गीय एच.एस. दास ने पूजा कार्यक्रम के स्वरूप को निखारने और उसे भव्यता प्रदान करने में विशेष योगदान दिया। इन सभी विभूतियों का जीवन और योगदान इस बात का प्रमाण है कि किसी परंपरा को स्थापित करना जितना कठिन होता है, उसे निरंतर जीवंत बनाए रखना उससे भी बड़ी जिम्मेदारी होती है। जागृति महोत्सव की 43 वर्षों की यात्रा इन्हीं संकल्पों और सामूहिक प्रयासों की कहानी कहती है।
वरिष्ठ सदस्यों की निष्ठा से निरंतर आगे बढ़ती रही परंपरा
महोत्सव को व्यवस्थित, संगठित और निरंतर संचालित करने में समिति के वरिष्ठ एवं प्रमुख सदस्यों की भूमिका भी उल्लेखनीय रही है। कन्हैयालाल मिश्र, उमेश सिंह, घनश्याम राजपूत, अरुण कुमार मिश्र, डॉ. चंद्रकांत गर्ग, मुख्य कार्यकारी सदस्य राजेंद्र वर्मन, भरत रैकवार तथा विद्युत सुरक्षा विभाग से जुड़े अरुण कर्मकार सहित अन्य निष्ठावान सदस्यों ने अपने सहयोग, श्रम और समर्पण से इस परंपरा को आगे बढ़ाने में योगदान दिया है। इन सदस्यों की सहभागिता यह संदेश देती है कि धार्मिक आयोजनों की वास्तविक भव्यता केवल साज-सज्जा या विशाल पंडालों में नहीं, बल्कि उन लोगों की निस्वार्थ सेवा में निहित होती है, जो पर्दे के पीछे रहकर आयोजन को सफल बनाते हैं।
चार दशक की विरासत, नई पीढ़ी के कंधों पर जिम्मेदारी
कन्हैयालाल मिश्र बताते हैं कि आज जागृति दुर्गा पूजा महोत्सव केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अनूपपुर की सांस्कृतिक चेतना, पारिवारिक जुड़ाव और सामाजिक समरसता का प्रतीक बन चुका है। इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि वरिष्ठ पीढ़ी के अनुभव और युवा पीढ़ी के उत्साह का समन्वय इस विरासत को आगे बढ़ा रहा है। समय बदलता रहा, पीढ़ियां बदलती रहीं, लेकिन मां भगवती के प्रति श्रद्धा और आयोजन को लेकर समर्पण की भावना बनी रही। यही निरंतरता जागृति महोत्सव की सबसे बड़ी पूंजी है। इस परंपरा से जुड़ी स्मृतियां उन लोगों के योगदान को भी जीवंत रखती हैं, जिन्होंने कभी इस आयोजन को खड़ा करने और आगे बढ़ाने का संकल्प लिया था।
43वें वर्ष में विशेष आराधना की तैयारी
महोत्सव के 43वें वर्ष के अवसर पर पूजा पंडाल में पारंपरिक विधि-विधान के साथ मां जगदंबा की आराधना और विविध धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारी की है। समिति ने समस्त धर्मप्रेमी नगरवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर मां भगवती के दर्शन-पूजन करने और इस गौरवशाली परंपरा का सहभागी बनने की अपील की है।
जागृति महोत्सव का संदेश स्पष्ट है आस्था वह ज्योति है, जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक संस्कारों का प्रकाश पहुंचाती है। स्वर्गीय प्रभाकर मिश्र ‘गुरुजी’ सहित इस परंपरा को स्थापित करने और संवारने वाली सभी विभूतियों का योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा। 43 वर्षों से प्रज्वलित यह ज्योति अनूपपुर की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक एकता की पहचान बनकर निरंतर प्रकाशित होती रहे, यही मां भगवती के चरणों में कामना है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला