अनूपपुर: पारंपरिक आस्था और लोक संस्कृति के रंग में रंगा रूप चौदस का पर्व
अनूपपुर, 07 नवंबर (हि.स.)। दीपोत्सव के दूसरे दिन रूप चौदस (नरक चतुर्दशी) का पर्व शनिवार को अनूपपुर, शहडोल अंचल में पारंपरिक श्रद्धा, उल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह से ही घरों में पर्व की विशेष रौनक देखने को मिली।
सूर्योदय से पहले उठकर तेल और उबटन लगाने तथा अभ्यंग स्नान करने की सदियों पुरानी परंपरा का लोगों ने उत्साहपूर्वक निर्वहन किया। खास बात यह रही कि आधुनिक जीवनशैली के बीच भी अंचल के लोग अपनी पारंपरिक रीति-रिवाजों और खानपान को पूरी आत्मीयता के साथ सहेजे हुए हैं।
रूप चौदस पर सुबह से ही घरों में चहल-पहल शुरू हो गई थी। महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से उबटन तैयार किया और परिवार के सदस्यों को तेल एवं उबटन लगाकर स्नान कराया। मान्यता है कि रूप चौदस पर सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान करने से शरीर में निखार आता है और आरोग्य की प्राप्ति होती है। इसी धार्मिक विश्वास के चलते ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी परिवारों तक इस परंपरा का विशेष महत्व बना हुआ है।
चौसेला और कद्दू की सब्जी से जुड़ी अंचल की पहचान
अनूपपुर और शहडोल अंचल में रूप चौदस का पर्व पारंपरिक पकवानों के बिना अधूरा माना जाता है। इस अवसर पर घर-घर में मक्के के आटे से चौसेला तैयार किया गया। इसके साथ कद्दू की सब्जी बनाने की विशेष परंपरा है। स्नान और पूजा-अर्चना के बाद परिवार के सभी सदस्यों ने एक साथ बैठकर पारंपरिक भोजन का आनंद लिया। यह व्यंजन केवल स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि अंचल की खानपान संस्कृति और पीढ़ियों से चली आ रही पारिवारिक परंपराओं का भी हिस्सा है।
छोटी दीपावली पर घरों में दीप सजाने की तैयारी
नरक चतुर्दशी को छोटी दीपावली भी कहा जाता है। पर्व के अवसर पर घरों की साफ-सफाई और सजावट के साथ दीपावली की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। बाजारों में दीपक, बाती, तेल, मिठाइयों और पूजन सामग्री की खरीदारी होती रही। शाम को घरों में दीप प्रज्ज्वलित कर सुख-समृद्धि की कामना की गई। रूप चौदस का पर्व एक बार फिर इस बात का साक्षी बना कि बदलते समय के बावजूद शहडोल अंचल की पारंपरिक मान्यताएं, खानपान और सांस्कृतिक विरासत आज भी लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला