अनूपपुर: नो-एंट्री में भारी वाहनों की आवाजाही से यातायात की कार्यप्रणाली से बदनाम हो रहा जिला
अनूपपुर, 03 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिला मुख्यालय में यातायात व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में है। शहर में निर्धारित नो-एंट्री व्यवस्था के बावजूद भारी वाहनों की आवाजाही, हाइवें वा मुख्य मार्गो में इंट्री वसूली रूकने के नाम नही ले रही है। प्रमुख मार्गों और शहर के व्यस्त हिस्सों में यातायात का दबाव बढ़ने के साथ जाम की स्थिति निर्मित होने और दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी हुई है।
बदनाम हो रहा अनूपपुर जिला
शहर के प्रवेश द्वारों से लेकर हाईवे तक भारी वाहनों की आवाजाही के बीच यातायात अमले की मौजूदगी को लेकर लोगो में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। जिले से होकर गुजरने वाले वाहन चालकों तथा लोगो का कहना है कि प्रदेश के अन्य जिलों में हाईवे पर यातायात पुलिस की मौजूदगी कम ही दिखाई देती है, लेकिन अनूपपुर जिले की सीमा में प्रवेश करते ही हाईवे पर यातायात अमला सक्रिय नजर आता है। यहां इंट्री के नाम पर वसूली की जाती है, जो प्रदेश भरमें अनूपपुर जिले की छवि बदनाम हो रही हैं। हैदराबाद से आ रहें वाहन चालक रमेश सिंह जो कोतमा जा रहा था था बताया कि मै हैदराबाद से आ गया कहीं भी सडक पर पुलिस ने नहीं रोका लेकिन अनूपपुर सीमा में प्रवेश करते ही यातायात पुलिस ने सडक पर चलानी कार्यवाई के नाम पर अवैध वसूली करती है।
नो-एंट्री व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल
अनूपपुर जिला मुख्यालय में भारी वाहनों के प्रवेश को नियंत्रित करने के लिए नो-एंट्री व्यवस्था बनाई गई है। इसका उद्देश्य शहर के अंदर यातायात का दबाव कम करना और आम नागरिकों को जाम तथा दुर्घटनाओं के जोखिम से राहत देना है। लेकिन यदि प्रतिबंधित समय में भी भारी वाहन शहर की सड़कों पर प्रवेश करते हैं तो यह व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई बार भारी वाहनों की आवाजाही के कारण छोटे वाहनों, दोपहिया चालकों और पैदल राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बाजार क्षेत्र,बस स्टैण्ड और प्रमुख चौराहों पर वाहनों का दबाव बढ़ने से यातायात की गति प्रभावित होती है। ऐसे में नो-एंट्री के नियमों का सख्ती से पालन क्यो नही किया जा रहा है।
अनूपपुर-बिजुरी, अनूपपुर-अमरकंटक, अनूपपुर-वेंकटनगर और अनूपपुर-शहडोल मार्ग शहर के प्रमुख संपर्क मार्ग हैं। इन मार्गों पर यातायात अमले की तैनाती और वाहन जांच की गतिविधियां प्रत्येाक दिन और हर समय दिखाई देती हैं। इसके बावजूद शहर के भीतर जाम, पार्किंग, भारी वाहनों की आवाजाही और नो-एंट्री के पालन जैसी समस्याएं पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पा रही हैं। यदि प्रमुख मार्गों पर पर्याप्त यातायात बल तैनात है, तो शहर के प्रवेश बिंदुओं पर ही भारी वाहनों की निगरानी क्यों नहीं की जाती? यदि नो-एंट्री का समय निर्धारित है तो उस दौरान प्रवेश करने वाले वाहनों का रिकॉर्ड क्यों नहीं सार्वजनिक किया जाता? वहीं यदि किसी विशेष परिस्थिति में किसी भारी वाहन को प्रवेश की अनुमति दी जाती है तो उसके लिए निर्धारित नियम और प्रक्रिया क्या है, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक होनी चाहिए।
चालानी कार्रवाई बनाम यातायात व्यवस्था सुधारने की बहस
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी सामने आ रही है कि यातायात पुलिस की सक्रियता मुख्य मार्गों पर चालानी कार्रवाई की नाम पर इंट्री वसूलने में अधिक दिखाई देती है, जबकि शहर की मूलभूत यातायात समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। जनचर्चा है कि अनूपपुर से गुजरने वाले मार्गों पर जांच और चालानी कार्रवाई का सामना लोगो को करना पड़ता है। ऐसे में सवाल यह है कि चालानी कार्रवाई के साथ-साथ शहर के यातायात प्रबंधन पर भी उतना ही ध्यान दिया जा रहा है या नहीं। चालानी कार्रवाई स्वयं यातायात नियमों के पालन का हिस्सा है, लेकिन इसके साथ नो-एंट्री, पार्किंग, जाम और भारी वाहनों के प्रवेश जैसे मुद्दों पर भी प्रभावी कार्रवाई अपेक्षित है। लेकिन वाहनो से इंट्री वसूलना यातायात के किन नियमों में आता है।
यातायात प्रभारी की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
यातायात प्रभारी की कार्यप्रणाली को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ नागरिकों और वाहन चालकों का आरोप है कि यातायात अमले की प्राथमिकता वाहन जांच और चालानी कार्रवाई पर अधिक दिखाई देती है, जबकि शहर की यातायात व्यवस्था से जुड़े मूल सवालों का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। आये दिन सोशल मीडिया में नो इंट्री के समय भारी वाहनो के प्रवेश, शहर में ओव्हर स्पीड़ दौड़ रहे भारी वाहनो का वीडियो हजारों बार सामने आई है। लेकिन यातायात प्रभारी को यातायात के इन नियमों के पालन के लिये गहरी निंद्रा से उठाना अब संभव नही हो पा रहा है।
शहर की सड़कों पर बढ़ रहा यातायात दबाव
अनूपपुर जिला मुख्यालय में लगातार बढ़ती वाहन संख्या के बीच यातायात प्रबंधन की चुनौती भी बढ़ रही है। बाजार क्षेत्रों में पार्किंग की समस्या, सड़क किनारे खड़े वाहन, भारी वाहनों की आवाजाही और व्यस्त चौराहों तिराहो पर यातायात दबाव आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है। ऐसे में यातायात व्यवस्था को प्रबंधित करने की जरूरत महसूस की जा रही है। प्रवेश और निकास बिंदुओं पर निगरानी, नो-एंट्री के समय का सख्त पालन, पार्किंग व्यवस्था, प्रमुख चौराहों पर प्रभावी तैनाती और नियम तोड़ने वाले वाहनों पर कार्रवाई से यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिये यातायात प्रभारी पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहे है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिला मुख्यालय की यातायात व्यवस्था सीधे तौर पर आम लोगों की सुरक्षा और सुविधा से जुड़ा विषय है। इसलिए पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को इस मामले में स्पष्ट स्थिति सामने रखनी चाहिए। नागरिकों की मांग है कि पुलिस अधीक्षक विक्रांत मुरान एवं जिला प्रशासन द्वारा नो-एंट्री व्यवस्था की कैसी समीक्षा की जाती है, जिसके कारण यातायात व्यवस्थाप दिन प्रतिदिन बद से बदत्तर होती जा रही है। आखिकर कार यातायात प्रबंधन के लिये यातायात प्रभारी अपनी जिम्मेदारी से क्यो भागते नजर आ रहे है?
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जगनाथ मरकाम ने शनिवार को कहा कि इसकी जानकारी लेकर कार्यवाही की जाएगी साथ ही पुलिस अधीक्षक को भी ज्ञात कराया जाएगा जिससे इस तरह की मनमानी रोका जा सके।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला