मंदसौरः सुखासागर महाराज का प्रथम समाधि दिवस श्रद्धापूर्वक मनाया गया

 


मन्दसौर, 28 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मंदसौर में सकल दिगंबर जैन समाज, मन्दसौर के तत्वावधान में परम पूज्य मुनिराज १०८ श्री सुखासागर जी महाराज का प्रथम समाधि दिवस मंगलवार को श्रद्धापूर्वक मनाया गया। इस पावन अवसर पर नाकोड़ा नगर स्थित 'आचार्य सन्मति कुंज' संत भवन में 'आचार्य सन्मतिसागर विधान' का भव्य आयोजन किया गया।

यह धार्मिक अनुष्ठान गुरु मां आर्यिका रत्न १०५ श्री समर्थ श्री जी एवं सार्थक श्री माताजी के मंगल सानिध्य में संपन्न हुआ। डॉ एस एम जैन ने बताया कि कार्यक्रम प्रात: ७:०० बजे से प्रारंभ होकर ९:३० बजे तक चला। कार्यक्रम के दौरान विशेष पूजा-अर्चना,शांति धारा और गुरु भक्ति के कार्यक्रम हुए। आयोजित विधान विधानाचार्य पंडित विजय कुमार गांधी के द्वारा संपन्न कराया गया। विधान में प्रमुख रूप से सपत्नी डॉक्टर एस एम जैन सहित कुलथाना परिवार के अन्य सदस्य एवं समाज जन ने विधान में सम्मिलित होकर धर्म लाभ लिया।

आर्यिका 105 समर्थ श्री माताजी ने आयोजित धर्म सभा में मंगल प्रवचनों में वर्तमान जीवनशैली पर गहरा प्रहार करते हुए धर्म और स्वास्थ्य के अंतर संबंधों को रेखांकित किया। माताजी ने कहा कि आज हमारी दिनचर्या अस्त-व्यस्त हो चुकी है, जिसके कारण बीमारियां हमें घेर रही हैं। यदि नींव ही कमजोर होगी, तो समाज की उन्नति संभव नहीं है।

माताजी ने शुद्धि पर जोर देते हुए कहा कि केवल शरीर ही नहीं, बल्कि मुख शुद्धि के उपरांत ही मंदिर प्रवेश करना चाहिए। उन्होंने गिरती पाचन शक्ति का कारण बताते हुए कहा कि खान-पान में मयार्दा का अभाव ही रोगों की जड़ है। सुबह उठते ही भगवान का नाम ले और मुख में जमा रात भर की लार को पानी के साथ शरीर में उतारे । पुराने समय में गन्ने (कपड़े) से छानकर पानी पीने की परंपरा थी, जो स्वास्थ्य और अहिंसा दोनों दृष्टि से उत्तम थी।

पानी की एक बूंद में असंख्य जीव होते हैं। अनछना पानी पीकर हम अनजाने में ही जीवों की हत्या के भागी बनते हैं। यदि हम आज किसी जीव की रक्षा करेंगे, तो वही जीव किसी अन्य जन्म (भव) में हमारी रक्षा का निमित्त बनेगा। माताजी ने कहा कि सामूहिक पापों से बचकर प्रभु की आराधना में मन लगायें।

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हिन्दुस्थान समाचार / अशोक झलोया