अनूपपुर: नर्मदा परिक्रमा करना जीवन का सबसे बड़ा पुण्य - मुख्यमंत्री
अनूपपुर, 13 अप्रैल (हि.स.)। मां नर्मदा की कृपा से नर्मदा ,सोन, जोहिला तीन नदियों का उद्गम अमरकंटक से होता है। जीवन भर पुण्य करने से ही व्यक्ति को अमरकंटक आने का सौभाग्य मिलता है जब से सृष्टि है तब से अमरकंटक अमर है। अमरकंटक में नर्मदा परिक्रमा करना जीवन का सबसे बड़ा पुण्य होता है।
यह बात सोमवार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव पवित्र नगरी अमरकंटक में नर्मदे हर सेवा न्यास द्वारा आयोजित पंच परिवर्तन विषय पर आयोजित गोष्ठी एवं भाजपा के दिवंगत नेता स्वर्गीय भगवत शरण माथुर के श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने सबसे पहले सनातन संस्कृति पर काम करना शुरू किया और जन्माष्टमी रामनवमी गोवर्धन पूजा सहित अन्य त्योहार सरकार के द्वारा मनाए जाते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मां नर्मदा की कृपा हम सब पर, जल्द ही नर्मदा परिक्रमा मार्ग होगा पूर्ण होगा। उन्हों ने कहा कि जीवन की प्रारंभिक इकाई परिवार है परिवार में ही यदि संस्कार मिले तो बचपन से ही व्यक्तित्व का निर्माण होता है। हम सभी को परिवार के साथ भोजन करते हुए बच्चों को परिवार के महत्व को समझना चाहिए इसके साथ ही बच्चों को महापुरुषों की कहानी भी सुनाना चाहिए। पुरातन काल से ही हमारी परंपरा प्रकृति संरक्षक की रही है। जहां पूरी दुनिया में वैश्विक लड़ाई से उथल-पुथल की स्थिति निर्मित है वहीं भारत में इसका कोई असर नहीं है।
दिवंगत भाजपा नेता डॉ भगवत शरण माथुर पर विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि उनके जिला प्रचारक रहने के दौरान ही मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में शामिल हुआ था। राजनीतिक व्यक्ति होने के साथ ही वह एक बेहतर सामाजिक व्यक्ति भी थे यही कारण है कि उज्जैन में उनके जिला प्रचारक रहने के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का पथ संचलन होने पर कांग्रेस नेता भी अपने घरों के बाहर निकाल कर पुष्प वर्षा करते थे।
इसके पूर्व मुख्यमंत्री हेलीपैड से सीधे कार्यक्रम स्थल पहुंचे जहां मंच पर उन्होंने दिवंगत भाजपा नेता भगवत शरण माथुर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की इसके बाद कन्या पूजन करने के पश्चात संतों का सम्मान किया। कार्यक्रम को पूर्व विधायक एवं कोल विकाश प्राधिकरण के अध्यक्ष रामलाल रौतेल ने संबोधित करते हुए नर्मदे हर सेवा न्यास के गठन और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही उन्होंने न्यास में प्रशिक्षण केंद्र भवन शैक्षणिक तथा आध्यात्मिक उन्नति किए जाने के लिए मुख्यमंत्री से मांग की साथ ही न्यास परिसर में गौशाला का निर्माण तथा बाउंड्री बाल का निर्माण कराई जाने की मांग की, साथ ही नगर परिषद बरगवां अमलाई का नाम बदलकर बरगवां अमलाई देवहरा करने की मांग रखी। इसके पश्चात कुटीर एवं ग्रामोद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।
मुख्यमंत्री ने माँ नर्मदा उद्गम स्थल पर की पूजा-अर्चना
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अनूपपुर जिले के पवित्र तीर्थ स्थल अमरकंटक प्रवास के दौरान माँ नर्मदा के उद्गम स्थल पहुंचकर मां नर्मदा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने माँ नर्मदा की आरती कर प्रदेश के नागरिकों के उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि एवं चहुँमुखी विकास के लिए मंगल कामना की।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि माँ नर्मदा मध्य प्रदेश की जीवनरेखा है और उनका आशीर्वाद सदैव प्रदेशवासियों पर बना रहता है। उन्होंने अमरकंटक की पावनता एवं आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए प्रदेश के समग्र विकास एवं जनकल्याण का संकल्प दोहराया।
मध्यप्रदेश शासन के वन एवं पर्यावरण मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री दिलीप अहिरवार, कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल, अध्यक्ष श्री नर्मदे हर सेवा न्यास एवं मध्य प्रदेश कोल विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष (कैबिनेट मंत्री दर्जा) रामलाल रौतेल, जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष पद्मश्री मोहन नागर, विधायक जयसिंहनगर विधानसभा क्षेत्र मनीषा सिंह ने भी मां नर्मदा की पूजा-अर्चना की।
प्रचलित मिथक या मान्यता : नर्मदा को पार करने वाले की गई कुर्सी
अमरकंटक को लेकर यह एक प्रचलित मिथक या मान्यता है कि यदि कोई राजनेता या बड़ी हस्ती हेलीकॉप्टर से सीधे अमरकंटक में नर्मदा नदी के उद्गम स्थल (लगभग 8 किमी के दायरे में) पर उतरती है, तो उसे अपनी सत्ता या पद से हाथ धोना पड़ सकता है। इस मान्यता के अनुसार, नर्मदा नदी को नाराज करने से कुर्सी चली जाती है। हालांकि, यह नुकसान जान-माल का नहीं, बल्कि राजनीतिक सत्ता या कुर्सी (पद) का माना जाता है।
इस मिथक से जुड़े मुख्य उदाहरण (मान्यतानुसार): पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी: स्थानीय लोग बताते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जब हवाई मार्ग से अमरकंटक आई थीं, तो उसके बाद उनकी सत्ता चली गई थी। आज प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव भी हेलीकॉप्टर से अमरकंटक में उतरे हैं। इससे पहले अमरकंटक में हेलीकॉप्टर से पहुंचने वाले इंदिरा गांधी सहित पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई, पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह, पूर्व उपराष्ट्रपति भैरो सिंह शेखावत, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह, भंवर सिंह पोर्ते, पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, सुंदरलाल पटवा, कमलनाथ शामिल हैं। जिन्हेंु हेलीकॉप्टर से आने के बाद अपनी कुर्सी गवानी पड़ी।
मां नर्मदा मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित धनेश द्विवेदी वंदे महाराज ने बताया कि मां नर्मदा की नगरी में नर्मदा नदी के ऊपर से जो भी हेलीकाप्टर से गुजरता है उसे मां नर्मदा उसके पद पर नहीं रहने देती हैं। मां नर्मदा कभी भी अहंकार को बर्दाश्त नहीं करती हैं इसीलिए जो भी यहां हेलीकॉप्टर से आया है उसे आज तक अपनी सत्ता गंवानी पड़ी है।
इसी मिथक के चलते, मध्य प्रदेश के कई बड़े नेता, जैसे पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, अमरकंटक हेलिकॉप्टर से नहीं जाते और बाहर ही उतरते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 2017 में अमरकंटक यात्रा के दौरान हेलिकॉप्टर को पहले ही एक गांव में उतारा था और आगे का रास्ता सड़क मार्ग से तय किया था।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला