अनूपपुर: अनूपपुर लॉज हादसे में परिजन का दर्द, पिता का शव दबा था औक अनजान बेटा हटाता रहा मलबा
अनूपपुर, 06 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के कोतमा नगर के बस स्टैंड के सामने शनिवार लाज का भवन गिरने से जीजा- साले समेत तीन लोगों की जान चली गई। वहीं तीन घायल हुए जिनका इलाज जारी है। सुबह पिता ने कहा था कि मैं गांव में महुआ बीन रहा हूं, काम पर नहीं जाऊंगा। शाम को लॉज का भवन गिरा, तो मैं जेसीबी लेकर मलबा हटाने पहुंचा। रेस्क्यू के दौरान ही अस्पताल से फोन आया कि तुम्हारे पिता का शव यहां आया है। उनकी मलबे में दबने से मौत हो गई है।’
यह कहते हुए हेमराज यादव की आवाज कांप जाती है। 55 वर्षीय हेमराज के पिता हनुमानदीन यादव जिले के कोतमा में शनिवार को अग्रवाल लॉज का भवन के मलबे में दब गए थे। इसके अलावा उनके साले 40 वर्षीय रामकृपाल यादव और 45 वर्षीय राधाबाई कोल की भी मौत हुई है। राधाबाई की शव एक दिन बाद ईंट-सीमेंट के ढेर से निकाली जा सकी। तब तक उनका इकलौता बेटा मलबे के पास बदहवास बैठा रहा। रविवार को तीनों का अंतिम संस्कार किया गया।
खेती-बाड़ी के साथ राजमिस्त्री का काम करते थे हनुमानदीन
हनुमानदीन यादव मूल रूप से अनूपपुर मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर लोढ़ी गांव में रहते थे। बड़े बेटे हेमराज ने बताया कि पिता ज्यादातर समय गांव में ही बिताते थे। मां का 19 साल पहले देहांत हो गया था। परिवार में दो भाई और एक बहन हैं। मैं खुद नगर परिषद की गाड़ी और जेसीबी चलाता हूं। छोटा भाई भी राजमिस्त्री है। दोनों भाई परिवार के साथ कोतमा के वार्ड नंबर 4 में रहते हैं। पिताजी खेती-बाड़ी देखने के साथ राजमिस्त्री का काम भी करते थे। गांव से अनूपपुर के लिए अपडाउन करते थे। एक हफ्ते पहले बात हुई थी। कहा था कि महुए का सीजन चल रहा है, इसलिए उसे बीनने में लगा हूं। काम पर नहीं जाऊंगा।
बेटा बोला- नहीं पता था कि पिता लॉज में काम कर रहे हैं
हेमराज ने कहा- शनिवार को हादसे के बाद मैं भी जेसीबी से मलबा हटाने के काम में जुटा था। रात करीब साढ़े सात बजे पहला शव निकाला गया। उसे एम्बुलेंस से सिविल अस्पताल पहुंचा दिया गया। 8 बजे अस्पताल से पार्षद रज्जू सोनी का कॉल आया। उन्होंने कहा कि शव के पास से आधार मिला है, उसमें तुम्हारे पिता का नाम लिखा है। आकर पहचान कर लो। मेरे हाथ-पांव फूल गए। सोचा कि पिताजी यहां कैसे आ गए? आनन-फानन में अस्पताल पहुंचा। पिता का शव देखकर पैरों तले जमीन खिसक गई। पता चला कि घटना के वक्त वह भी लॉज की चौथी मंजिल पर टाइल्स लगाने का काम कर रहे थे। वह पिछले दो हफ्ते से यहां आ रहे थे। मुझे इस बारे में जरा भी जानकारी नहीं थी।
घर से सुबह निकले थे, कहा था कि देरी से आऊंगा
लॉज के मलबे में दबने से रामकृपाल यादव की भी जान चली गई। रामकृपाल, हनुमानदीन के साले थे। मूल रूप से बनगवा गांव के रहने वाले थे। रामकृपाल के इकलौते बेटे दुर्गेश यादव ने बताया कि परिवार में दादा-दादी, मां और मैं ही बचा हूं। एक्सीलेंस कॉलेज से ग्रेजुएशन कर रहा हूं। पिता पेशे से बेलदार थे। रोजाना 300 रुपए मिलते थे। आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से पिता रोजाना 22 किलोमीटर साइकिल चलाकर काम पर जाते थे। वह भी पिछले एक हफ्ते से लॉज में काम कर रहे थे। उस दिन भी रोजाना की तरह सुबह करीब 8 बजे निकले। कहा था कि आज पेमेंट मिलेगा। आने में थोड़ा लेट हो जाऊंगा।
कमाने वाले एक थे, अब घर कैसे चलेगा?
रात करीब 8:30 बजे तक पिताजी नहीं आए। उन्हें कॉल किया, तो मोबाइल स्विच ऑफ मिला। थोड़ी देर बाद फूफाजी हनुमानदीन के बेटे हेमराज ने कॉल कर लॉज गिरने की बात कही। हम अनूपपुर पहुंचे। उन्होंने ही फूफाजी के देहांत की खबर दी। मैंने कहा कि इसी भवन में पिताजी भी काम कर रहे थे, लेकिन उनका कहीं पता नहीं चल रहा था। रात करीब 11:30 बजे पिता का शव निकाला जा सका। फिलहाल, ग्राम पंचायत की ओर से पांच हजार और रेडक्रॉस की ओर से एक लाख रुपए का चेक मिला है। घर में पिता ही अकेले कमाने वाले थे। पिछले दो साल में मां के तीन ऑपरेशन हो चुके हैं। इसका करीब सवा लाख रुपए कर्ज पहले से है। अब समझ नहीं आ रहा कि घर कैसे चलेगा?
मां कहती थी कि बहू कब घर लाएगा?
हादसे में राधाबाई कोल की भी मलबे में दबकर मौत हो गई। उनका शव दूसरे दिन रविवार की दोपहर मिला। वह कोतमा में ही वार्ड नंबर 4 के दमकी टोला में रहती थीं। घटना के समय राधाबाई बिल्डिंग में मजदूरी कर रही थीं। परिवार में इकलौता बेटा आकाश है, जो पढ़ाई करता है। आकाश ने बताया- पिता हेमराज कोल का पहले ही देहांत हो चुका है। दोनों मां-बेटे मामा के यहां रहते थे। मां अपने भाई पर आश्रित नहीं होना चाहती थीं, इसलिए खुद मजदूरी करके घर चला रही थीं। घटना वाले दिन भी वह रोजाना की तरह मजदूरी के लिए निकली थीं। देर शाम तक नहीं आईं। फिर मलबे में दबकर मौत की सूचना मिली। आकाश ने रोते हुए कहा- मां कहती थी कि बेटा तू शादी कब करेगा, कब बहू घर लाएगा?
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला