अनूपपुर: टीईटी के विरोध में सड़क पर उतरे शिक्षक

 








अनूपपुर, 08 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिला मुख्यागलय में बुधवार को संयुक्त मोर्चा बैनर तले शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों ने प्रदर्शन किया।

सैकड़ों शिक्षक सड़कों पर उतरे और सामतपुर तालाब के प्रांगण में दोपहर धरना प्रदर्शन कियाए इसके बाद रैली के रूप में कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च करते हुए रैली निकाली। जहां अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम अपर कलेक्टर दिलीप पांडेय को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। 18 अप्रैल को भोपाल में प्रस्तावित प्रदेशस्तरीय आंदोलन में बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल होंगे।

शिक्षकों की मुख्य मांग है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को समाप्त किया जाए। इसके साथ ही, उनकी सेवा अवधि की गणना नियुक्ति की पहली तिथि से की जाए, ताकि उन्हें पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य वैधानिक लाभ मिल सकें।

संयुक्त मोर्चा के जिला अध्यक्ष संतोष कुमार मिश्रा ने बताया कि लोक शिक्षण संचालनालय और जनजातीय कार्य विभाग ने नॉन-TET शिक्षकों को परीक्षा उत्तीर्ण करने के निर्देश जारी किए हैं। शिक्षकों का कहना है कि ये निर्देश नियमों और न्यायालय के निर्णयों के विपरीत हैं। उन्होंने राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की अधिसूचना का हवाला दिया, जिसमें कई वर्गों को पहले से ही इस पात्रता परीक्षा से छूट प्रदान की गई है।

शिक्षक संध के जिला अध्यक्ष संजय निगम ने आरोप लगाया कि सरकार ने 25 साल पहले तत्कालीन भर्ती नियमों के तहत नियुक्तियां की थीं। अब नए आदेशों के तहत उन्हें अयोग्य बताकर टीईटी परीक्षा देने को कहा जा रहा है। इस आदेश से मध्य प्रदेश के लगभग 4 लाख शिक्षकों का भविष्य अधर में लटक गया है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला पिछले साल सितंबर में आया था, लेकिन 6 महीने बीतने के बावजूद सरकार ने अब तक कोई कानूनी कदम नहीं उठाया है। यह आंदोलन सोई हुई सरकार को जगाने के लिए किया गया है ताकि समय सीमा समाप्त होने से पहले याचिका दायर की जा सके।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय में भी उक्त छूट का समर्थन किया गया है। इसके बावजूद, विभागीय स्तर पर सभी कार्यरत शिक्षकों पर यह परीक्षा थोपना उचित नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि मार्च 2026 में जारी आदेशों को तत्काल निरस्त किया जाए और प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख शिक्षकों को इस बाध्यता से राहत दी जाए। मध्य प्रदेश सरकार से सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय पर पुनर्याचिका के लगाने की मांग दोहराई, शिक्षकों ने धरना प्रदर्शन में नवीन संवर्ग के शिक्षकों को प्रथम नियक्ति दिनांक से वरिष्ठता की मांग उठाई, जिसमे ग्रेज्यूटी, पेंसन, अवकाश नगदीकरण, पदोन्नति-क्रमोन्नती आदि का लाभ मिल सके।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला