शिक्षक राष्ट्र चेतना के शिल्पी और भविष्य के संस्कारकर्ता-सुरेश सोनी
उज्जैन , 13 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय में मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल के सदस्य सुरेश सोनी का बौद्धिक हुआ। उन्होंने कहाकि भारत की सांस्कृतिक परंपरा ने सदा यह सिखाया है कि अधिकारों से पूर्व कर्तव्यों का बोध आवश्यक है। जब शिक्षक स्वयं कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और नैतिकता के आदर्श प्रस्तुत करता है, तभी विद्यार्थी के भीतर राष्ट्रबोध विकसित होता है।
सोनी ने कहाकि राष्ट्र कोई केवल भू-सीमा या प्रशासनिक व्यवस्था नहीं है, अपितु वह एक सजीव चेतना है, जिसका निर्माण व्यक्ति के संस्कारों से होकर समाज के चरित्र में होता है। इस चेतना को जाग्रत रखने में शिक्षकों की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान नहीं, बल्कि राष्ट्र के भावी कर्णधारों का निर्माण करने वाली प्रयोगशालाएं हैं। ज्ञान यदि संस्कार से रहित हो, तो वह समाज को दिशा नहीं दे सकता और संस्कार यदि बौद्धिक दृढ़ता से विहीन हों, तो वे टिक नहीं पाते। आज के समय में विश्वविद्यालयों से अपेक्षा है कि वे केवल रोजगार-कौशल ही नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व, सांस्कृतिक चेतना और समरस दृष्टि भी विकसित करें। यदि शिक्षण कार्य के केन्द्र में राष्ट्र, समाज और मानवता का हित रखा जाए, तो शिक्षा स्वत: ही राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम बन जाती है। विश्वविद्यालय के आचार्यगण आप सभी राष्ट्र की उस मौन साधना के वाहक हैं, जिसके बल पर भारत अपनी आत्मा के साथ आगे बढ़ता है।
कुलगुरु प्रो. शिवशंकर मिश्र तथा कुलसचिव प्रो.दिलीप सोनी ने श्री सोनी का स्वागत कर पाणिनीया पत्रिका भेंट की। अपने संबोधन में प्रो.मिश्र ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल ज्ञानार्जन का केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्र चेतना के संस्कार स्थल हैं। शिक्षक की भूमिका को राष्ट्र निर्माण के शिल्पी के रूप में जिस स्पष्टता और गरिमा के साथ रेखांकित किया गया, वह अत्यंत प्रेरक है। यह संदेश आज के शैक्षणिक परिवेश में विशेष रूप से प्रासंगिक है, जहां शिक्षा का उद्देश्य केवल कौशल नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण भी होना चाहिए। आभार कुलसचिव प्रो. दिलीप सोनी ने माना।
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हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्वेल