मुरैनाः नल-जल योजना बेअसर, पानी के लिए जूझ रहे ग्रामीण; 600 रुपये का टैंकर खरीदने को मजबूर
मुरैना, 03 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के आदिवासी बहुल पहाड़गढ़ विकासखंड में पेयजल संकट ने गंभीर रूप ले लिया है। वर्षों से पानी की समस्या झेल रहे ग्रामीणों का आरोप है कि नल-जल योजना धरातल पर पूरी तरह विफल साबित हुई है। हालात ऐसे हैं कि करीब 8 हजार की आबादी वाले पहाड़गढ़ मुख्यालय के अधिकांश लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार 21 वार्डों में रहने वाली लगभग 70 प्रतिशत आबादी नियमित जलापूर्ति से वंचित है। ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और संबंधित अधिकारियों से कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका। ग्रामीणों का कहना है कि सीएम हेल्पलाइन पर शिकायतें दर्ज कराने के बाद भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
क्षेत्र में पानी की दो बड़ी टंकियां और दो बड़े बोरवेल मौजूद हैं, लेकिन जलापूर्ति व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित नहीं हो पा रही। ग्रामीणों का आरोप है कि सप्लाई शुरू होने के कुछ समय बाद ही बंद हो जाती है, जबकि गर्मी के मौसम में अधिकांश हैंडपंप भी जवाब दे देते हैं। ऐसे में लोगों को मिलकर 600 रुपये खर्च कर पानी के टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पानी की तलाश में बच्चों को स्कूल छोड़कर पानी भरने जाना पड़ता है। कई परिवारों में दिन का बड़ा हिस्सा केवल पेयजल की व्यवस्था करने में बीत जाता है। स्थानीय लोगों ने ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि वर्षों से क्षतिग्रस्त पाइपलाइन और खराब वाल्वों की मरम्मत नहीं कराई गई। इसके अलावा कई स्थानों पर अवैध कनेक्शनों के कारण भी जलापूर्ति प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों के अनुसार खड़रियापुरा और जाजीपुरा जैसे आदिवासी बहुल इलाकों में स्थिति और भी खराब है, जहां नल-जल योजना का लाभ आज तक नहीं पहुंच पाया है। पेयजल संकट का असर सरकारी संस्थानों पर भी दिखाई दे रहा है। अस्पताल और शासकीय आवासों तक में पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
अस्पताल में पदस्थ एएनएम मालती बाथम ने बताया कि अस्पताल परिसर में पानी की कमी के कारण कामकाज प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि दो दशक पहले यहां आने के बाद से ही क्षेत्र में जल संकट बना हुआ है और गर्मी में स्थिति और गंभीर हो जाती है।
स्थानीय निवासी मीना परमार ने बताया कि लोग नियमित रूप से पानी के बिल का भुगतान कर रहे हैं, लेकिन पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। कई बार बच्चों को पढ़ाई छोड़कर कुएं या अन्य स्रोतों से पानी लाने भेजना पड़ता है।
वहीं ग्रामीण शिवकुमार शर्मा का कहना है कि आठ-दस दिन में एक बार नल से पानी आता है और वह भी गंदा होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं।
इस संबंध में जिला पंचायत सदस्य हरीसिंह पानो कुशवाह का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्र होने और पाइपलाइन की तकनीकी चुनौतियों के कारण समस्या बनी हुई है। उन्होंने बताया कि वे अपने निजी नलकूप से आसपास के लोगों को नि:शुल्क पानी उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहे हैं।
उधर, सरपंच शैलेन्द्र शाक्य ने बिजली कटौती और तकनीकी खामियों को जलापूर्ति बाधित होने का प्रमुख कारण बताया। उन्होंने ग्रामीणों के आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि समय-समय पर व्यवस्था सुधारने के प्रयास किए जाते रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान के लिए व्यापक सुधार की आवश्यकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा