मृत कर्मचारी के खाते में नौ माह तक जाता रहा वेतन, प्रभारी सीएचएमओ निलंबित

 


राजगढ़, 1 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के स्वास्थ्य विभाग में शासकीय धन के भुगतान से जुड़ी गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। नरसिंहगढ़ के लसूडला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ स्वीपर सुमित्राबाई की जनवरी 2025 में मृत्यु हो गई थी। विभाग को उनकी मृत्यु की सूचना भी दे दी गई थी, इसके बावजूद उनके बैंक खाते में अक्टूबर 2025 तक हर माह 14,844 रुपये वेतन के रूप में जमा होते रहे। मामले में स्वास्थ्य विभाग ने तत्कालीन प्रभारी सीएचएमओ डॉ. शोभा पटेल को निलंबित कर दिया है।

विभागीय जांच में सामने आया कि सुमित्राबाई की मृत्यु के बाद स्वास्थ्य केंद्र की ओर से संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई थी। हाजिरी रजिस्टर में उनकी अंतिम उपस्थिति 15 जनवरी 2025 दर्ज है। इसके बाद उनका नाम उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज नहीं किया गया। इसके बावजूद उनके बैंक खाते में वेतन का भुगतान अक्टूबर 2025 तक जारी रहा।

मामला सामने आने के बाद क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं, भोपाल संभाग की ओर से तीन सदस्यीय जांच दल गठित किया गया। जांच दल ने मामले से जुड़े दस्तावेजों और अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल की। 22 सितंबर 2026 को प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन में तत्कालीन प्रभारी सीएमएचओ डॉ. शोभा पटेल, लेखापाल दिनेश पारिक सहित संबंधित अधिकारियों की भूमिका का उल्लेख किया गया।

जांच प्रतिवेदन के परीक्षण के बाद डॉ. शोभा पटेल पर पद के दुरुपयोग और स्वेच्छाचारिता बरतने के आरोप प्रथम दृष्टया सामने आए। इसके बाद भोपाल संचालनालय की ओर से 1 अक्टूबर को निलंबन आदेश जारी किया गया। आदेश के अनुसार डॉ. शोभा पटेल को मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियमों के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान डॉ. शोभा पटेल का मुख्यालय क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं, भोपाल संभाग निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।

अन्य अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

मामले की जांच के दौरान तत्कालीन सेवानिवृत्त लेखापाल रामगोपाल नोरिया और लेखापाल दिनेश पारिक की भूमिका की भी जांच की गई है। विभागीय स्तर पर अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।

मामले में जनवरी 2025 में कर्मचारी की मृत्यु के बाद भी करीब नौ माह तक उसके बैंक खाते में वेतन भुगतान जारी रहने को लेकर विभागीय स्तर पर लापरवाही की जांच की गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर अब संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

हिन्दुस्थान समाचार / मनोज पाठक