स्कूल ड्रेस में खेत में धान रोपते छात्र, वीडियो वायरल होने के बाद उठे सवाल; प्राचार्य बोले- शैक्षणिक गतिविधि का हिस्सा
उमरिया, 08 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के करकेली विकासखंड के ग्राम देवरी मजरा स्थित सरस्वती स्कूल के छात्रों का खेत में धान की रोपाई करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में कई छात्र-छात्राएं स्कूल की वर्दी पहने पानी और कीचड़ से भरे खेत में धान के पौधे लगाते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद स्कूल में बच्चों से कृषि कार्य कराए जाने को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
वायरल वीडियो में छात्र खेत में उतरकर धान की पौध लगाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने इसे छात्रों से खेत में काम कराने का मामला बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे कृषि से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी देने वाली गतिविधि माना।
प्राचार्य ने मजदूरी कराने के आरोप से किया इनकार
मामले में विद्यालय के प्राचार्य सुरेंद्र सिंह ने छात्रों से खेत में मजदूरी अथवा कृषि कार्य कराने के आरोप से इनकार किया है। उनका कहना है कि छात्रों को कृषि की प्रक्रिया समझाने के लिए यह गतिविधि कराई गई थी।
प्राचार्य के मुताबिक विद्यालय के पास स्थित खेत में बच्चों को धान की रोपाई की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी जा रही थी। यह विद्यालय की परियोजना आधारित शैक्षणिक गतिविधि का हिस्सा थी। उन्होंने बताया कि संबंधित खेत स्कूल परिसर से लगा हुआ है और छात्रों को कृषि संबंधी व्यावहारिक जानकारी देने के उद्देश्य से वहां ले जाया गया था।
वीडियो के बाद गतिविधि की प्रकृति पर सवाल
हालांकि वीडियो वायरल होने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि उद्देश्य केवल छात्रों को धान की रोपाई की प्रक्रिया समझाना था, तो उन्हें स्वयं खेत में उतरकर पौध लगाने की आवश्यकता क्यों पड़ी। प्रायोगिक शिक्षा के जानकारों के अनुसार विद्यार्थियों को व्यवहारिक अनुभव देना शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन ऐसी गतिविधियों में सुरक्षा व्यवस्था, अभिभावकों की सहमति और गतिविधि के स्पष्ट शैक्षणिक उद्देश्य का ध्यान रखना जरूरी है।
शिक्षा विभाग की जांच से स्थिति हो सकती है स्पष्ट
फिलहाल मामले में शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वायरल वीडियो की विभागीय स्तर पर जांच होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि छात्रों को खेत में ले जाने और धान रोपने की गतिविधि वास्तव में शैक्षणिक परियोजना का हिस्सा थी या उनसे कृषि कार्य कराया गया था।
वीडियो के सामने आने के बाद स्कूलों में प्रायोगिक गतिविधियों के संचालन, विद्यार्थियों की सुरक्षा और ऐसी गतिविधियों की निगरानी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। अब शिक्षा विभाग की संभावित जांच और उसके निष्कर्ष का इंतजार है।
हिन्दुस्थान समाचार / सुरेन्द्र त्रिपाठी