'छात्रों की गूंज' और पेपर लीक का मुद्दा सड़क से विधानसभा तक उठाएगी कांग्रेस: उमंग सिंघार
नीट-यूजी 2026 भर्ती परीक्षाओं में देरी और शिक्षा व्यवस्था पर सरकार को घेरा
भोपाल, 30 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा है कि 'छात्रों की गूंज' अभियान और नीट-यूजी 2026 के कथित पेपर लीक का मुद्दा केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगामी विधानसभा सत्र में भी जोरदार ढंग से उठाया जाएगा। मंगलवार को भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर शिक्षा व्यवस्था, भर्ती परीक्षाओं और युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। इस दौरान अभियान के संयोजक डॉ. अंशुल त्रिवेदी भी मौजूद रहे।
उमंग सिंघार ने कहा कि देश का युवा पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में देरी, शिक्षकों की कमी और शिक्षा व्यवस्था की अव्यवस्थाओं से परेशान है। उन्होंने कहा कि यह केवल परीक्षा का नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं के भविष्य का सवाल है। उनके अनुसार, छात्र फेल नहीं हो रहे, बल्कि सरकार की परीक्षा व्यवस्था फेल हो रही है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा कोटा से शुरू किए गए राष्ट्रव्यापी छात्रों की गूंज अभियान के तहत भारतीय युवा कांग्रेस और एनएसयूआई 25 जून से 9 अगस्त तक देशभर में कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। अभियान के अंतर्गत 1 अगस्त को जिला कलेक्टर कार्यालयों के बाहर 'छात्र सत्याग्रह' और 9 अगस्त को 'दिल्ली चलो' कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
सिंघार ने आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश में एमपीपीएससी (एमपीपीएससी) और एमपीईएसबी (एमपीईएसबी) की भर्ती परीक्षाओं में लगातार देरी, परीक्षा निरस्त होने, दूरस्थ परीक्षा केंद्र और परिणामों में विलंब से लाखों युवा प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के 17 सरकारी विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों के 1,069 स्वीकृत पदों में से 793 पद रिक्त हैं, जबकि उच्च शिक्षा पर राज्य के कुल बजट का लगभग 0.96 प्रतिशत ही खर्च किया जा रहा है।
नीट-यूजी 2026 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कथित पेपर लीक के कारण लाखों विद्यार्थियों का परीक्षा प्रणाली से भरोसा डगमगाया है। उनके अनुसार, इस घटना के बाद परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा कराने से छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ा तथा कई विद्यार्थियों ने अपनी जान गंवाई। उन्होंने कहा कि यह केवल पेपर लीक नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य और परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का संकट है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) सहित परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार तथा वार्षिक परीक्षा एवं भर्ती कैलेंडर लागू करने की मांग की।
अभियान के संयोजक डॉ. अंशुल त्रिवेदी ने बताया कि अभियान के संचालन के लिए 25 सदस्यीय कोर टीम बनाई गई है। प्रधानमंत्री को छात्रों के सुझावों के आधार पर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर खुला पत्र भेजा गया है। पत्र में देश के सभी शासकीय और निजी स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों तथा कोचिंग संस्थानों में मेंटल हेल्थ काउंसिल गठित करने और प्रशिक्षित मेंटल हेल्थ काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य करने की मांग की गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे