अनूपपुर: जनजातीय विश्वविद्यालय में सामाजिक सौहाद्र को बिगाड़ने के लिए षड्यंत्र, शोधछात्रों ने की निष्प्क्ष जांच की मांग
अनूपपुर, 27 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के अमरकंटक में स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय में झूठे जातिगत आरोप लगाकर सामाजिक सौहाद्र को बिगाड़ने के लिए षड्यंत्र चल रहा है। प्रायोजित जातिगत धरना के खिलाफ विश्वविद्यालय के शोधछात्रों अयान ब्रम्हा, रोहित श्रीवास तथा विशाल ताम्रकार ने बुधवार को कुलपति को ज्ञापन सौपा निष्प्क्ष जांच की मांग की है। साथ ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, कलेक्टर,पुलिस अधीक्षक का विशेष ध्यान आकर्षित करते हुए स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जाँच की मांग की है।
छात्रों ने आरोप लगाया है कि जनजातीय विवि में पिछले एक वर्ष से किसी भी सामान्य तथ्यों को एक राष्ट्रीय साजिश के तहत जातिवाद एवं क्षेत्रवाद से जोड़ने के बड़ा षडयंत्र चल रहा है। भारत सरकार तथा राष्ट्रवादी संगठन के खिलाफ लगातार फर्जी नैरेटिव चलाने की अंतरराष्ट्रीय साजिश चल रही है और साजिश करने वाले प्रोफेसर एक गिरोह बना लिए है जो जाति के नाम पर विवि प्रशासन के अधिकारियों को डराकर अपने अनुसार विवि की सत्ता संचालित करने की मंशा रखे हैं। इनका उद्देश्य देश भर में सामजिक समरसता को चोटिल कर भारत सरकार एवं मध्यप्रदेश सरकार को बदनाम करना है।
गोपनीय दस्तावेज चोरी कर हाईकोर्ट में याचिका लगाने के नाम पर हो रहा है संगठित अपराध
शोधछात्रों ने बताया की विश्वविद्यालय के कुछ प्रोफेसर सत्ता पर कब्जा करने के लिए अनैतिक गतिविधि संचालित करते हुए हाईकोर्ट में याचिका लगवाने के लिए याचिका को प्रायोजित करते हैं और इसके लिए लाखों रुपए भी देते हैं। इस मामले में बड़े स्तर पर संगठित अपराध हुआ है जिसमें विश्वविद्यालय प्रशासन में बैठे अस्सिटेंट रजिस्ट्रार और कुछ प्रोफेसर पूर्व कुलपति से आपस में मिली भगत करके अनेक फाइल और गोपनीय दस्तावेज की चोरी से फोटोकॉपी करवा लिए हैं और उसका उपयोग भयादोहन, धमकाने इत्यादि में किया जा रहा है। इस मामले में संगठित अपराध में शामिल अज्ञात प्रोफेसर और अज्ञात लोगों के विरुद्ध एक अलग से याचिका शीघ्र ही दायर की जा रही ताकि जब भी इन चोरी के दस्तावेजों को न्यायालयीन प्रक्रिया में उपयोग करने का मामला सामने आए, तब ऐसे लोगों के खिलाफ संगठित अपराध करने और इस आपराधिक षडयंत्र में शामिल लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही किया जा सके तथा इसकी सूचना भारत सरकार के संबंधित विभाग को भी दिया जा सकें।
विश्वविद्यालय एससी सेल को फर्जी जातिवाद वाले शिकायत को प्रोत्साहित करने से बचाना चाहिए
शोध विद्वान एवं अनुसूचित जाती युवा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अयान ब्रम्हा ने बताया कि विश्वविद्यालय में घोटाला से रुपये कमाने के लिए मिथ्या एवं भड़काऊ आरोपों तथा अनधिकृत धरने जैसी घटनाओं से परिसर में गृह युद्ध जैसा वातावरण बन गया है, दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य से किसी निर्दोष व्यक्ति पर बनावटी एवं साजिशन झूठा जातिगत आरोप लगाकर लक्षित करना विश्वविद्यालय की गरिमा, सुरक्षा एवं सामाजिक समरसता के लिए उचित नहीं है। जनजातीय विश्वविद्यालय में विभिन्न राज्यों एवं समाज के सभी वर्गों अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग तथा सामान्य वर्ग के विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इसप्रकार के असत्य एवं प्रायोजित प्रकरणों तथा प्रभावशाली प्रोफेसरों से संपर्कों का हवाला देकर झूठे मामलों में फँसाने एवं प्रायोजित आंदोलन के माध्यम से जातिगत व क्षेत्रीय तनाव बढ़ता है, विवि में वामपंथी विचारों और जेएनयु की राह पर चल दिया है, एससी सेल शिक्षकों को समरसता का ध्यान रखना चाहिए, अन्यथा विवि के सभी वर्गों के शिक्षक अपना-अपना जातिगत समूह बना लेंगे और विवि का सम्पूर्ण पतन हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के अनुसूचित जाति/जनजाति प्रकोष्ठ किसी भी प्रकरण को जातिगत स्वरूप प्रदान करने से पूर्व समस्त तथ्यों का निष्पक्ष एवं गहन सत्यापन सुनिश्चित किया जाए, किसी वर्ग-विशेष से संबंधित होने का अर्थ यह नहीं कि किसी निर्दोष पर असत्य आरोप लगाए जाएँ। परिसर में बाहरी एवं असामाजिक तत्वों का अनधिकृत प्रवेश, प्रलोभन देकर प्रायोजित कराए जाने वाले आंदोलन तथा कतिपय अन्य अवैध गतिविधियाँ संस्था की सुरक्षा एवं गरिमा के लिए चिंता का विषय हैं। अमरकंटक की धरती एवं विश्वविद्यालय को किसी भी प्रकार की राष्ट्र-विरोधी अथवा विधि-विरुद्ध गतिविधि का केंद्र बनने से रोकने, प्रायोजित धरना की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जाँचकर नियमानुसार एफ.आई.आर. दर्ज करने की माँग की गई है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला