मंदसौरः नरवाई प्रबंधन पर उद्यानिकी महाविद्यालय में कार्यशाला संपन्न
मंदसौर, 26 फरवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मंदसौर में गुरुवार को किसान कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत उद्यानिकी महाविद्यालय में कृषि विभाग एवं कृषि विज्ञान केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में नरवाई प्रबंधन विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर नरवाई प्रबंधन की उन्नत तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए कलेक्टर अदिती गर्ग ने कहा कि नरवाई प्रबंधन से किसानों को लाभ के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी संभव है। उन्होंने कहा कि नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम होती है तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए भूमि की गुणवत्ता प्रभावित होती है, इसलिए नरवाई नहीं जलाकर उसका उचित प्रबंधन किया जाना चाहिए। उन्होंने किसानों से नरवाई को मिट्टी में मिलाने तथा परंपरागत खेती पद्धतियों को अपनाने का आग्रह किया। कलेक्टर ने कहा कि जिले के उन्नत किसानों को और अधिक उन्नत बनाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
कलेक्टर ने बताया कि जिले में अलसी के डंठल से रेशा तैयार करने का नवाचार किया जा रहा है, जिस पर पिछले छह माह से कार्य चल रहा है। एफपीओ के माध्यम से इस क्षेत्र में मशीन विकसित की गई है तथा किसानों के सहयोग से इस कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने बताया कि एफपीओ के माध्यम से किसानों को प्रति हेक्टेयर लगभग 1200 से 1500 रुपये तक प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है। उन्होंने कृषि विभाग, एफपीओ एवं कृषि विज्ञान केंद्र को समन्वय से कार्य करते हुए किसानों को इस नवाचार से जोड़ने तथा समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने किसानों से प्रत्येक रविवार को जैविक हाट बाजार में जैविक उत्पादों के विक्रय एवं उपयोग को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि जिले में देश का पहला सरसों संगम आयोजित किया गया, जिसमें प्रदेश के उन्नत किसानों ने भाग लिया। इस दौरान किसानों ने नरवाई प्रबंधन से संबंधित सुझाव भी प्रस्तुत किए। कार्यशाला में किसानों को नरवाई नहीं जलाने की शपथ भी दिलाई गई।
हिन्दुस्थान समाचार / अशोक झलोया