मऊगंज : भीषण गर्मी के बीच आदिवासी परिवारों के घरों पर चला बुलडोजर
मऊगंज, 02 मई (हि.स.)। मध्यप्रदेश के नवनिर्मित मऊगंज जिले में प्रशासन की बुलडोजर कार्रवाई ने सात आदिवासी परिवारों को बेघर कर दिया। वार्ड क्रमांक 11 में शनिवार को हुई इस कार्रवाई के बाद महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भीषण गर्मी में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए हैं, जिससे पूरे इलाके में आक्रोश का माहौल है।
पीड़ित परिवारों का कहना है कि जिन मकानों को अतिक्रमण बताकर गिराया गया, उनके पास वैध भू-अधिकार पट्टे मौजूद थे। इन पट्टों के आधार पर उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान भी मिले थे। इसके बावजूद प्रशासन ने बिना पर्याप्त समय दिए उनके घरों को ध्वस्त कर दिया।
शनिवार सुबह भारी पुलिस बल और राजस्व अमले के साथ पहुंची टीम ने बस्ती में कार्रवाई शुरू की। देखते ही देखते मकानों को गिराया जाने लगा। इस दौरान महिलाएं और बुजुर्ग अपने दस्तावेज दिखाकर कार्रवाई रोकने की गुहार लगाते रहे, लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई। आरोप है कि परिवारों को अपना सामान तक निकालने का समय नहीं मिला और अनाज, बर्तन सहित गृहस्थी का सामान मलबे में दब गया।
घटना के बाद प्रभावित परिवारों के सामने भोजन और आश्रय का संकट खड़ा हो गया है। भीषण गर्मी और बदलते मौसम के बीच छोटे बच्चों और बुजुर्गों की स्थिति और भी चिंताजनक बताई जा रही है। पीड़ितों ने सवाल उठाया है कि जब सरकार ने स्वयं उन्हें पट्टे दिए और आवास योजना का लाभ दिया, तो अब उन्हीं घरों को अवैध कैसे घोषित किया जा रहा है।
मामले की जानकारी मिलते ही कांग्रेस के पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर आर्थिक सहायता प्रदान की। उन्होंने इस कार्रवाई को अमानवीय बताते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि पूर्व में दिए गए पट्टों को नजरअंदाज कर गरीबों को बेघर किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रभावित परिवारों में जल्द ही कई शादियां प्रस्तावित थीं, लेकिन इस कार्रवाई से उनकी खुशियां उजड़ गईं।
फिलहाल राजस्व विभाग की ओर से इस मामले में कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। घटना के बाद पुनर्वास को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पीड़ित परिवारों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से उचित मुआवजा और पुनर्वास की मांग की है।
यह घटना न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि संवेदनशील मामलों में मानवीय दृष्टिकोण और पारदर्शिता कितनी जरूरी है। अब सभी की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि प्रभावित परिवारों को राहत और न्याय कब तक मिल पाता है।
हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्द्र द्विवेदी