इंदौर के भागीरथपुरा में अब स्थिति तेजी से हो रही सामान्य, शनिवार से शुरू होगा शुद्ध जल अभियान
- एसीएस मंडलोई और राजन ने की स्थिति की समीक्षा, बैठक में लिये गये अनेक महत्वपूर्ण निर्णय
इंदौर, 09 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हुई 20 मौतों के बाद जिला प्रशासन की टीम क्षेत्र में राहत कार्यों में जुटी है। जल जनित घटना के बाद किया जा रहे कार्यों से अब स्थिति तेजी से सामान्य हो रही है। क्षेत्र में प्रभावित नागरिकों के स्वास्थ्य में भी लगातार सुधार आ रहा है। क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल के वितरण की भी प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
शुक्रवार को अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई और अनुपम राजन की विशेष उपस्थिति में हुई बैठक में भागीरथपुरा क्षेत्र की स्थिति के बारे में समीक्षा की गई। बैठक में संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।
अपर मुख्य सचिव मण्डलोई और राजन ने बैठक में बताया कि आपदा को अवसर में बदलकर पूरे शहर को दूषित जल से मुक्ति के लिये कारगर प्रयास सुनिश्चित किये जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 10 जनवरी से प्रदेशव्यापी शुद्ध जल अभियान प्रारंभ किया जा रहा है। अभियान के तहत शुद्ध जल आपूर्ति पर विशेष फोकस रहेगा। अभियान में सभी जल स्रोतों की जांच, त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई और व्यापक जनजागरूकता के कार्य प्राथमिकता से होंगे। इस घटना को एक चेतावनी मानते हुए पूरे प्रदेश में जल आपूर्ति व्यवस्था की सतत समीक्षा की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति न हो और नागरिकों को सुरक्षित पेयजल एवं सुरक्षित जीवन परिवेश मिल सके।
मण्डलोई ने बैठक में नगर निगम को निर्देश दिए कि शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए हर समय तत्पर और सजग रहे। बैठक में बताया गया कि अब नई रणनीति के साथ शासन-प्रशासन कार्य करने के लिए पूरी तरह तैयार है और पूरे प्रदेश में शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।
बैठक में दिए गए प्रमुख निर्देश
उपचार व्यय पर निगरानी: अस्पतालों में किए गए उपचार का आर्थिक भार किसी भी प्रभावित परिवार पर न पड़े, इसके लिए कलेक्टर स्वयं सतत निगरानी करेंगे। डिस्चार्ज होते समय इस बात पर फोकस करें कि उनके बिल की राशि न मांगी जाए। अस्पताल प्रबंधन को ताकीद कर दे।
व्यापक स्वास्थ्य जांच: भागीरथपुरा क्षेत्र में एक व्यापक स्वास्थ्य जांच अभियान शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा, ताकि सभी नागरिकों के स्वास्थ्य की समुचित जांच हो सके। जांच अभियान में बुजुर्गो, महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण पर विशेष ध्यान दिया जायेगा। गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं एवं अन्य बीमारियों का विशेष सर्वे होगा। कोमॉर्बिडिटी (अन्य बीमारियों) की पहचान और जागरूकता अभियान चलेगा।
‘अभियान विश्वास’ की शुरुआत: आमजन का भरोसा बहाल करने के उद्देश्य से एक विशेष जनविश्वास अभियान चलाया जाएगा।
कम्युनिटी आधारित प्रबंधन
भागीरथपुरा क्षेत्र के लगभग 50 हजार परिवारों को 20–25 जोन में विभाजित किया जायेगा। गठित स्वसहायता समूहों और आवश्यकता के अनुसार नए स्वसहायता समूह गठित कर स्थानीय महिलाओं और आमजन की भागीदारी विकासात्मक तथा कल्याणकारी गतिविधियों में सुनिश्चित की जायेगी। प्रत्येक 50–100 घरों पर एक प्रभारी अधिकारी तैनात रहेंगे। समूहों द्वारा अस्पताल से डिस्चार्ज मरीजों से सतत संपर्क, दवाओं की निगरानी और रिलेप्स रोकने पर फोकस रहेगा।
तत्कालिक एवं दीर्घकालिक समाधान: अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि समस्या के तत्काल निवारण के साथ-साथ स्थायी समाधान हेतु भी ठोस प्रयास किए जाएं। अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने कहा कि यह पूरा कार्य मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन एवं सतत सुपरविजन में किया जा रहा है।
मुख्य निर्णय एवं कार्ययोजना
बैठक में बताया गया कि मेन पाइपलाइन से जुड़े सभी शासकीय बोरवेल सील किए जाएंगे, ताकि किसी भी प्रकार का कंटामिनेशन रोका जा सके। भागीरथपुरा क्षेत्र का ओवरहेड टैंक परीक्षण में सुरक्षित पाया गया है। बैठक में जानकारी दी गई कि 13 जनवरी से टंकी के माध्यम से जलप्रदाय पुनः प्रारंभ किया जाएगा। जल शुद्ध पाए जाने के बावजूद एहतियातन उबालकर पानी पीने की एडवाइजरी जारी रहेगी।
शहरव्यापी दीर्घकालिक सुधार
बैठक में बताया गया कि केवल भागीरथपुरा नहीं, बल्कि पूरे इंदौर शहर की जल आपूर्ति एवं भूजल गुणवत्ता की निगरानी की जायेगी। इसके लिये पूरे शहर के 105 ओवरहेड टैंकों पर इलेक्ट्रॉनिक/कंप्यूटरीकृत वाटर एनालाइज़र लगाए जाएंगे। रीयल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए कंट्रोल रूम में विशेष व्यवस्था होगी। बताया गया कि सीवेज लाइन, मेन पाइपलाइन, चैंबरों की लीकेज रोकथाम, प्लास्टरिंग एवं सीलिंग के कार्य को प्राथमिकता के साथ किया जायेगा।
अपर मुख्य सचिव राजन ने कहा कि यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण रही, लेकिन इससे सबक लेते हुए शासन-प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो। पीड़ितों को श्रेष्ठ चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराना और नागरिकों को सुरक्षित, शुद्ध पेयजल सुनिश्चित करना प्राथमिकता है।
बैठक में बताया गया कि इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में हुई जलजनित घटना के बाद जिला प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से किए जा रहे कार्यों से स्थिति में निरंतर सुधार हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा भागीरथपुरा के प्रभावित क्षेत्र में सघन दौरा किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा उल्टी दस्त के जो मरीज स्वस्थ होकर लोटे थे, उनका लगातार फालोअप किया जा रहा है।
क्षेत्र में हुई जलजनित घटना से कुल 446 मरीज विभिन्न अस्पतालों मे भर्ती हुए, जिनका राज्य शासन द्वारा नि:शुल्क उपचार कराया गया। इसमें से अभी तक कुल 396 मरीज स्वस्थ्य होकर डिस्चार्ज हो चूके हैं। वर्तमान में अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या 50 है। इसमें से 10 मरीज आईसीयू में है, इन सभी भर्ती मरीजों का समुचित उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रभावित क्षेत्र में किट प्रदान की जा रही है। इस प्रत्येक किट में 10 पैकेट ओ.आर.एस. तथा 30 गोलियां जिंक की हैं। क्षेत्र में लगातार एम्बुलेंस भी तैनात की गई हैं। 24x7 चिकित्सकों की ड्यूटी क्षेत्र में लगाई गई है। आवश्यकता पड़ने पर मरीजों को एमवाय चिकित्सालय, अरविंदों अस्पताल तथा बच्चों को चाचा नेहरु अस्पताल में रेफर किया जा रहा है। जो मरीज निजी चिकित्सालयों में जा रहें हैं, वहाँ पर भी निःशुल्क उपचार, जॉच एवं औषधि की व्यवस्था जिला प्रशासन द्वारा करायी जा रही है। प्रभावित क्षेत्र में प्रचार-प्रसार सामग्री का वितरण किया जा रहा है, जिसमें उल्टी-दस्त से बचाव के बारे में जानकारी प्रदान की जा रही है।
क्षेत्र में 200 टीमों के माध्यम से 28 हजार 267 घरों का सर्वे किया गया, इसमें एक लाख 34 हजार 516 लोग कवर किए गए। क्षेत्र में एक लाख 13 हजार 641 पैकेट ओआरएस के, एक लाख 18 हजार से अधिक जिंक टैबलेट वितरित की गई। जल शुद्धिकरण के लिए 5 हजार 13 घरों में क्लिनवेट ड्रॉप वितरित किए गए।
बताया गया कि क्षेत्र में रिंग सर्वे भी कराया गया। रिंग सर्वे के तहत क्षेत्र में निरंतर कार्रवाई जारी है। प्रभावित क्षेत्रों से नियमित सैंपल कलेक्शन कर उनकी मॉनिटरिंग की जा रही है। नागरिकों को पानी उबालकर एवं छानकर पीने के लिए लगातार समझाइश दी जा रही है। साथ ही, क्षेत्र में टैंकरों के माध्यम से सतत स्वच्छ जल वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है। प्रभावित नागरिकों का समुचित उपचार नि:शुल्क किया जा रहा है। इस कार्य में जिला प्रशासन, नगर निगम एवं स्वास्थ्य विभाग की टीमें समन्वय के साथ लगातार सक्रिय हैं।
निरीक्षण के दौरान पेयजल टैंकरों से हो रहे जल वितरण की व्यवस्था की गई है। लाइन लीकेज सुधार कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए गए। नगर निगम द्वारा गठित 32 बीटों के माध्यम से भागीरथपुरा क्षेत्र के प्रत्येक हिस्से में दूषित जल पर नियंत्रण, स्वच्छ पेयजल आपूर्ति तथा व्यापक सफाई अभियान की नियमित समीक्षा की जा रही है।
भागीरथपुरा क्षेत्र में हुई जलजनित घटना के बाद प्रशासन द्वारा किए जा रहे कार्यों से सुधार नजर आने लगा है। क्षेत्र में कोबो टूल का प्रयोग किया गया। इस टूल के माध्यम से किसी भी स्थिति का रियल टाईम में जानकारी प्राप्त की गई है। प्रशासन और नगर निगम द्वारा भागीरथपुरा के प्रभावित क्षेत्रों में नर्मदा तथा बोरिंग पाईप लाईनों के लीकेज आदि का सुधार कार्य करवाया गया। वर्तमान में जिस टंकी से क्षेत्र में पानी का वितरण किया जा रहा है उसे सुपरक्लोरिनेट (2 PPM से अधिक) कर वितरण किया जा रहा है। साथ ही पाईप लाइन की फ्लशिंग का कार्य भी किया जा रहा है।
इसके अलावा उपभोक्ताओं के यहां किये जा रहे नर्मदा जलापूर्ति की रेशिड्यूल क्लोरिन भी चेक की जा रही है। प्रशासन द्वारा नगर निगम के सहयोग से प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही क्लोरिनेशन का कार्य लगभग 450 प्रायवेट बोरवेल का भी क्लोरिनेशन कराया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्र के सभी ड्रेनेज चेम्बर, बेकलेन आदि की सफाई करायी जा रही है।
भागीरथपुरा क्षेत्र में विस्तृत सर्वे कार्य पूर्ण हो गया। सर्वे में लगभग 61 टीमें बनाई गई थी। प्रत्येक टीम ने घरों में कोबो टूल के माध्यम से रियल टाईम सर्वे किया। इसके तहत सर्वे टीम ने भागीरथपुरा क्षेत्र के प्रत्येक घर में ओ.आर.एस. के 10 पैकेट एवं जिंक की 30 टेबलेट वितरित की। इसके साथ-साथ ही एक क्लिनवेट ड्राप भी वितरित किए गए। सर्वे टीम द्वारा नागरिकों को क्लिनवेट के उपयोग के बारे में जागरूक किया गया।
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर